
मुंबई। नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के पर्यटक और नागरिक भी फंस गए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, 30 अगस्त तक महाराष्ट्र के कुल 405 नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी मिली है। इनमें से 262 नागरिकों को सुरक्षित घर वापस लाने की कार्रवाई की गई है, जबकि 76 नागरिक प्रशासन के संपर्क में हैं और सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं, 67 नागरिकों से अब तक संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है और उनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। संपर्क से बाहर नागरिकों और पर्यटकों की तलाश के लिए केंद्र सरकार का विशेष दल काठमांडू पहुंच गया है। नेपाल में भारत के राजदूत ने भी विशेष दल से मुलाकात कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावित नागरिकों से संपर्क कर उनकी सुरक्षा की जानकारी जुटाने के साथ उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की कोशिश जारी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राज्य प्रशासन यात्रा में आ रही बाधाओं को दूर करने और फंसे हुए लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है। प्रशासन के मुताबिक, रिचा टूर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से यात्रा पर गए 60 नागरिकों के समूह से अभी तक सीधे संपर्क नहीं हो सका है। इसके अलावा सात अन्य नागरिकों का ऑनलाइन लिंक के माध्यम से पंजीकरण हुआ है, लेकिन उनसे भी संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है। इन सभी 67 लोगों के ठिकाने और उनकी स्थिति की जानकारी हासिल करने के प्रयास जारी हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य प्रशासन पूरे राहत अभियान पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। महाराष्ट्र के अन्य 69 नागरिक भी आगे की यात्रा पूरी कर मुंबई पहुंचेंगे। तिब्बत में मानसरोवर के पास सागा से निकले 37 नागरिक 29 अगस्त की शाम सुरक्षित मुंबई पहुंच चुके हैं। इसी तरह सुरक्षित बताए गए नागरिकों में नागपुर के 105 लोग भारत वापस लौट चुके हैं। राज्य सरकार का कहना है कि शेष नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ के कारण पैदा हुई गंभीर परिस्थितियों के बीच महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन विभाग केंद्र सरकार, भारतीय दूतावास और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता संपर्क से बाहर 67 नागरिकों का जल्द से जल्द पता लगाना और बाढ़ प्रभावित सभी महाराष्ट्रवासियों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करना है।

