
साहित्य-हास्य और ग़ज़ल के रंगों से सजी महफ़िलदेश के प्रतिष्ठित कवियों ने गीत, कविता, हास्य और ग़ज़लों से बांधा समां
कोलकाता। रेलटेल द्वारा कोलकाता में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन साहित्य, हास्य, गीत और ग़ज़ल के विविध रंगों से सराबोर रहा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं और प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं को भावनाओं, संवेदनाओं और हास्य की साहित्यिक यात्रा कराई। कार्यक्रम में गंभीर काव्य से लेकर हास्य और श्रृंगार तक साहित्य के अलग-अलग रंग देखने को मिले।कवि सम्मेलन में डॉ. विष्णु सक्सेना, दिनेश रघुवंशी, खुशबू शर्मा, विनोद पाल, मनोज टंडन और विवेक कुमार गुप्ता ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। प्रत्येक कवि की अलग शैली और विषयवस्तु ने कार्यक्रम को रोचक और विविधतापूर्ण बनाए रखा।डॉ. विष्णु सक्सेना और दिनेश रघुवंशी ने अपने भावपूर्ण गीतों और काव्य रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को संवेदनाओं और काव्य की खूबसूरत दुनिया से जोड़ा। वहीं, खुशबू शर्मा ने अपनी कविताओं और गीतों के माध्यम से मानवीय भावनाओं को प्रभावशाली स्वर दिया। उनकी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा।कवि सम्मेलन में हास्य का रंग भी खूब जमा। विनोद पाल और विवेक कुमार गुप्ता की हास्य प्रस्तुतियों ने सभागार को ठहाकों से गूंजा दिया। उनकी रचनाओं ने गंभीर साहित्यिक माहौल के बीच मनोरंजन और उल्लास का सुंदर संतुलन कायम किया।सम्मेलन का संचालन रेलटेल के निदेशक (पीओ एंड एम) मनोज टंडन ने किया। संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभाने के साथ उन्होंने ग़ज़लकार के रूप में अपनी चुनिंदा और प्रभावशाली ग़ज़लें भी प्रस्तुत कीं। उनकी कविता ‘वो घर बहुत मतवाले हुआ करते थे’ ने उपस्थित लोगों को बचपन की यादों में पहुंचा दिया। उनकी शायरी और नज़्मों ने महफ़िल को भावनात्मक गहराई प्रदान की और श्रोताओं की विशेष सराहना बटोरी।इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य से लेकर श्रृंगार, गीत से लेकर ग़ज़ल और गंभीर भावनाओं से लेकर सहज मनोरंजन तक साहित्य के अनेक रंग देखने को मिले। आयोजन की यही विविधता इसकी सबसे बड़ी विशेषता रही। कार्यक्रम को और अधिक व्यापक बनाने के लिए रेलटेल के अनेक कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े। उन्होंने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया। कर्मचारियों की इस सहभागिता से कवि सम्मेलन और अधिक जीवंत, रोचक एवं रचनात्मक बन गया।रेलटेल का यह आयोजन साहित्य और संस्कृति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति और साहित्यिक संवाद को प्रोत्साहित करने का प्रयास रहा। कोलकाता में सजी यह साहित्यिक महफ़िल शब्दों, संवेदनाओं, मुस्कानों और ठहाकों की ऐसी याद छोड़ गई, जिसे श्रोता लंबे समय तक याद रखेंगे।

