
23,524 गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया की पहचान, 21,337 को आयरन सुक्रोज या एफसीएम से दिया गया उपचार
मुंबई। गर्भावस्था महिलाओं के जीवन का महत्वपूर्ण चरण है और इस दौरान उचित पोषण एवं स्वास्थ्य देखभाल मां और नवजात शिशु दोनों के लिए बेहद जरूरी है। भारत में लगभग 52 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (रक्त की कमी) पाया जाता है। गंभीर एनीमिया प्रसव के दौरान और उसके बाद महिला के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है तथा मातृ एवं नवजात मृत्यु का भी एक महत्वपूर्ण कारण बन सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के मुफ्त उपचार को गति दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार वर्ष 2015 में स्वास्थ्य विभाग को आयरन सुक्रोज के माध्यम से एनीमिया का उपचार शुरू करने के निर्देश दिए थे। अब सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के मार्गदर्शन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (FCM) के जरिए उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को भी गंभीर एनीमिया के उपचार की सुविधा मिल रही है। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई के अंत तक 23,524 गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया की पहचान कर उन्हें उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की श्रेणी में रखा गया। इनमें से 21,337 महिलाओं को आयरन सुक्रोज या फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज के माध्यम से उपचार दिया गया है। राज्य में उपचार का आंकड़ा 91 प्रतिशत तक पहुंच गया है।सरकार ने गंभीर एनीमिया से निपटने के लिए ‘फोर टी स्ट्रैटेजी- टेस्ट, टॉक, ट्रीट और ट्रैक’ पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं की जांच, एनीमिया की पहचान, समय पर उपचार और उपचार के बाद दोबारा जांच एवं लगातार निगरानी की जा रही है। गर्भावस्था का पंजीकरण होते ही महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच के साथ आयरन-फोलिक एसिड के नियमित सेवन, पौष्टिक एवं आयरन युक्त भोजन के बारे में परामर्श और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के दिशा-निर्देशों के तहत वर्ष 2018-19 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उससे ऊपर की सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकों की निगरानी में गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज इंजेक्शन दिया जा रहा है। वर्ष 2024-25 से राज्य की सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में आयरन सुक्रोज के साथ अधिक प्रभावी फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है। उपचार को प्रभावी और सुरक्षित बनाने के लिए जनवरी 2026 में राज्य स्तर पर चिकित्सा अधिकारियों और संबंधित स्वास्थ्य कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके साथ दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने, समय पर रेफरल सेवा उपलब्ध कराने और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का अलग रिकॉर्ड रखकर उपचार पूरा होने तक उनकी निगरानी करने की व्यवस्था की गई है। राज्य में अहिल्यानगर, लातूर, बीड, चंद्रपुर, वर्धा, रत्नागिरी, वाशिम और बुलढाणा जिलों में गंभीर एनीमिया से पीड़ित 100 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को उपचार उपलब्ध कराया गया है। वहीं नागपुर, सिंधुदुर्ग, गोंदिया, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, हिंगोली, जालना, धाराशिव और ठाणे जिलों में उपचार का स्तर 95 से 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है। महानगरपालिका क्षेत्रों में भी अभियान को गति दी गई है। लातूर, नाशिक, भिवंडी, कोल्हापुर, उल्हासनगर, नांदेड-वाघाला, नवी मुंबई, सोलापुर, चंद्रपुर, परभणी और सांगली-मिरज-कुपवाड में पात्र गर्भवती महिलाओं के उपचार का आंकड़ा 100 प्रतिशत बताया गया है। वहीं नंदुरबार, सोलापुर, गडचिरोली, पालघर, नाशिक और भंडारा जैसे अपेक्षाकृत कम उपचार वाले जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने जनवरी से मार्च 2026 तक गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष अभियान भी चलाया था। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन का उपचार चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में ही किया जाना चाहिए। आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज के माध्यम से उपचार शरीर में आयरन का स्तर और हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ाने में मदद करता है। इससे रक्त में ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर होने के साथ थकान और कमजोरी कम हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर उपचार से गंभीर एनीमिया से जुड़ी समय से पहले प्रसव, प्रसव के दौरान या बाद में अत्यधिक रक्तस्राव और मातृ मृत्यु जैसी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

