
मुंबई। महाराष्ट्र की धरती पर उत्पादित कपास और उससे तैयार होने वाले उत्पाद अब सीधे विदेशी बाजारों तक पहुंचेंगे। राज्य सरकार कपास उत्पादन से लेकर वैश्विक फैशन बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘फार्म टू फॉरेन’ अवधारणा के माध्यम से महाराष्ट्र को वैश्विक एक्सपोर्ट हब बनाया जाएगा, ऐसा विश्वास उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने व्यक्त किया। बुधवार को उपमुख्यमंत्री शिंदे मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में एसोचैम द्वारा आयोजित ‘फार्म टू फॉरेन कॉन्क्लेव-2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके हाथों एसोचैम की वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ यानी ‘फाइव-एफ विजन’ पर कार्य कर रही है। कपास उत्पादन से लेकर वैश्विक फैशन उद्योग तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने के लिए राज्य में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र को टेक्सटाइल हब के रूप में स्थापित करने में कपड़ा मिलों की ऐतिहासिक भूमिका रही है। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नागपुर का पीएम मित्रा पार्क और अमरावती टेक्सटाइल क्लस्टर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे। उन्होंने कहा कि उत्पादन प्रणाली को ग्रीन, डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। इचलकरंजी, सोलापुर और भिवंडी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। लाडकी बहन योजना के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक सिलाई प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने उद्योगपतियों से महाराष्ट्र में निवेश करने का भी आह्वान किया। उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा- कपास से बनने वाले धागों के माध्यम से हम केवल वस्त्र ही नहीं, बल्कि विकसित भारत का भविष्य भी बुन रहे हैं। जल्द ही लंदन, न्यूयॉर्क और पेरिस के फैशन शोरूम में ‘मेड इन महाराष्ट्र’ का टैग दिखाई देगा।

