महाराष्ट्र FDA में बड़ी कार्रवाई की तैयारी: मुंबई, ठाणे व नासिक के करीब 20 अधिकारी जांच के दायरे में

मालेगांव सुपारी मामले में पांच अधिकारी निलंबित, जब्त स्टॉक नष्ट करने की प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने राज्यभर में भोजनालयों, फूड आउटलेट्स, रेस्तरां और कैफे के खिलाफ निरीक्षण तेज कर दिए हैं। इसी बीच विभाग के कुछ अधिकारियों पर निरीक्षण के दौरान फूड कारोबारियों से कथित सांठगांठ और रिश्वत लेने के आरोप सामने आने के बाद आयुक्त तुकाराम मुंडे ने आंतरिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार मुंबई, ठाणे और नासिक क्षेत्रों के करीब 20 अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने अचानक निरीक्षण के दौरान खाद्य कारोबारियों के साथ मिलीभगत की और नियमानुसार कार्रवाई नहीं की। इन आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है।
मालेगांव सुपारी मामले में पांच अधिकारी निलंबित
नासिक डिवीजन से जुड़े मालेगांव सुपारी मामले में कथित अनियमितताओं के चलते पांच खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निलंबित किया गया है। निलंबित अधिकारियों में अविनाश दाभाड़े, अमित रास्कर, गोपाल कसार, योगेश देशमुख और सुवर्णा महाजन शामिल हैं।
बताया गया है कि यह कार्रवाई 15 अक्टूबर को की गई। मामला जब्त सुपारी को नष्ट करने की प्रक्रिया, दस्तावेजों और रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है।
10 करोड़ रुपये की सुपारी हुई थी जब्त
मालेगांव में 11 फरवरी 2024 को FDA अधिकारियों ने 3,605 बोरियों में रखी 252.328 मीट्रिक टन सुपारी जब्त की थी। जब्त स्टॉक की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई गई थी। प्रयोगशाला जांच में सुपारी को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए जाने के बाद अदालत ने इसे नष्ट करने का आदेश दिया था। बाद में इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे कि क्या पूरा स्टॉक वास्तव में नष्ट किया गया था या रिकॉर्ड में ही नष्ट दिखाया गया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सुपारी को नष्ट करने के लिए एक ही दिन में करीब 11 ट्रकों का इस्तेमाल दिखाया गया था। वाहनों, गवाहों और नष्ट किए गए स्टॉक से संबंधित दस्तावेजों में कथित विसंगतियां सामने आने के बाद मामले की जांच तेज हुई।
FDA प्रशासन अब जब्त खाद्य पदार्थों के प्रबंधन, नष्ट करने की प्रक्रिया, दस्तावेजी रिकॉर्ड और अधिकारियों की जवाबदेही की भी समीक्षा कर रहा है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

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