अवैध एग-डोनेशन रैकेट मामले में ED की महाराष्ट्र में 11 ठिकानों पर छापेमारी
बदलापुर, उल्हासनगर, नासिक और बारामती में कार्रवाई; 40 से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के शोषण की जांच

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित अवैध मानव अंडाणु निकालने और बेचने के रैकेट से जुड़े मनी ट्रेल की जांच के तहत शुक्रवार को महाराष्ट्र के बदलापुर, उल्हासनगर, नासिक और बारामती समेत 11 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई में फर्टिलिटी सेंटर, अस्पताल, गिरफ्तार एजेंटों और अन्य आरोपियों से जुड़े परिसरों को शामिल किया गया। ED इस कथित नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बिचौलियों की भूमिका और उन मेडिकल संस्थानों की जांच कर रही है, जहां महिलाओं को कथित तौर पर बार-बार एग-रिट्रीवल प्रक्रिया से गुजरने के लिए भेजा जाता था। जांच एजेंसी को संदेह है कि 40 से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं का इस नेटवर्क में इस्तेमाल किया गया। उल्हासनगर में ED ने कैंप-4 के सुभाष टेकड़ी स्थित दाहा चॉल में गिरफ्तार एजेंट मंजूषा वानखेड़े से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। एजेंसी के अनुसार, वह कथित तौर पर महिलाओं को इस प्रक्रिया के लिए लाने, स्थानीय स्तर पर उनके आवागमन की व्यवस्था करने और बिना उचित चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन सोनोग्राफी कराने में भूमिका निभाती थी। एक अन्य गिरफ्तार एजेंट अश्विनी रूपेश चाबुकस्वार से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। उल्हासनगर के एक सोनोग्राफी केंद्र की भी जांच की गई, जिसे स्थानीय निकाय ने मार्च 2026 में कथित नियम उल्लंघन के बाद सील किया था। बदलापुर में एक कथित अनधिकृत IVF सुविधा और नासिक में एक IVF सेंटर तथा उसके निदेशक से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई।
प्रति चक्र 25 से 30 हजार रुपये देने का आरोप
यह कार्रवाई बदलापुर पुलिस की जांच के बाद शुरू हुई। पुलिस ने मई 2026 में दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया था कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर बार-बार एग-डोनेशन प्रक्रिया से गुजरने के लिए तैयार किया जाता था। कथित तौर पर प्रत्येक चक्र के लिए 25 हजार से 30 हजार रुपये दिए जाते थे। पुलिस जांच के अनुसार, महिलाओं को 10 से 12 दिनों तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे, ताकि अंडाणु उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसके पहले और बाद में सोनोग्राफी कराई जाती थी और रिपोर्ट अलग-अलग राज्यों के IVF तथा ART सेंटरों को भेजी जाती थी। अंडाणु तैयार होने पर महिलाओं को कथित तौर पर इन केंद्रों में ले जाकर ऑपरेशन थिएटर में एग-रिट्रीवल कराया जाता था। एक मामले में एक महिला के कथित रूप से 33 बार ऐसी प्रक्रिया से गुजरने की बात सामने आई है।
फर्जी आधार और दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जांच
पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि महिलाओं की पहचान छिपाने और बार-बार एग-डोनेशन कराने के लिए फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। मामला उस समय सामने आया जब एक महिला ने कथित तौर पर वादा किया गया भुगतान नहीं मिलने की शिकायत स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से की। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बदलापुर में सुलक्षणा गाडेकर (44) के घर पर छापा मारा। वहां से करीब 3.94 लाख रुपये मूल्य के हार्मोन इंजेक्शन और सिरिंज बरामद होने का दावा किया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में गाडेकर ने कथित तौर पर महिलाओं को भर्ती करने, सोनोग्राफी की व्यवस्था करने, हार्मोनल इंजेक्शन लगाने और IVF सेंटरों को रिपोर्ट भेजने की भूमिका स्वीकार की थी।
5,000 पन्नों की चार्जशीट, 15 आरोपी
बदलापुर पुलिस ने मई 2026 में उल्हासनगर की अदालत में करीब 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें पांच डॉक्टरों समेत 15 आरोपियों के नाम शामिल थे और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने 25 गवाहों के बयान दर्ज किए और करीब 250 एग-डोनेशन प्रक्रियाओं की जांच की। ED की मौजूदा जांच मुख्य रूप से वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित है। एजेंसी महिलाओं और बिचौलियों को किए गए भुगतान, IVF सेंटरों से जुड़े ट्रांजैक्शन, मेडिकल संस्थानों के खातों और पूरे नेटवर्क से जुड़े आर्थिक संबंधों की पड़ताल कर रही है।
