
मुंबई। सिंधुदुर्ग जिले के दोडामार्ग, सावंतवाड़ी, बांदा और वेंगुर्ले क्षेत्रों में कथित अवैध जमीन खरीद-फरोख्त और गैरकानूनी प्लॉटिंग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कोकण मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने एसआईटी को सभी मामलों की गहन जांच कर जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में सिंधुदुर्ग जिले में अवैध भूमि लेन-देन की जांच के लिए गठित समिति के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में ऑनलाइन माध्यम से मंत्री नितेश राणे, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, कोकण मंडल आयुक्त रूबल अग्रवाल तथा सिंधुदुर्ग की जिलाधिकारी तृप्ती दोडमिसे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। राजस्व मंत्री बावनकुळे ने कहा कि कृषि भूमि को अवैध रूप से आवासीय भूखंडों में परिवर्तित करने की शिकायतों को रोकने के लिए प्रत्येक जमीन खरीद-फरोख्त के दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। यदि किसी दूसरे राज्य का व्यक्ति कृषि भूमि खरीदता है तो उसके सभी दस्तावेज संबंधित केंद्रीय प्राधिकरणों के समन्वय से सत्यापित किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि भूमि का उपयोग आवासीय उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। यदि जांच में ऐसा पाया जाता है कि कृषि भूमि का अवैध रूप से प्लॉटिंग या अन्य गैरकानूनी उपयोग किया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिना वैध दस्तावेजों के भूमि सौदे या अवैध प्लॉटिंग पाए जाने पर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। बावनकुळे ने बताया कि भूमि पंजीकरण की प्रक्रिया पंजीकरण अधिनियम, 1908, महाराष्ट्र स्टांप अधिनियम, 1958 तथा महाराष्ट्र पंजीकरण नियम, 1961 के तहत संचालित होती है। इस प्रक्रिया में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और खरीदार के किसान होने संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाती है। गैर-कृषकों अथवा औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भूमि खरीद के मामलों में भी संबंधित कानूनों के अनुसार सभी दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है। बैठक में मंत्री नितेश राणे ने कहा कि सिंधुदुर्ग जिला पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा है और बाहरी निवेश का स्वागत है, लेकिन किसी भी प्रकार की अनियमितता या गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि निवेश को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सभी भूमि लेन-देन में पारदर्शिता और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

