
मुंबई। भारत में बिना अनुमति जीवित जानवरों और विदेशी पालतू जीवों की अवैध आवाजाही पर रोक लगाने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए ऑपरेशन्स सर्कुलर के तहत यदि कोई एयरलाइन बिना आवश्यक अनुमति या कस्टम मंजूरी के किसी जीवित जानवर को भारत लेकर आती है, तो उसके तत्काल डिपोर्टेशन (मूल स्थान पर वापस भेजने) की पूरी कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारी संबंधित एयरलाइन की होगी। तत्कालीन महानिदेशक फैज़ अहमद किदवई द्वारा जारी ऑपरेशन्स सर्कुलर 02 ऑफ 2025 में ऐसे मामलों के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल निर्धारित किया गया है, जहां यात्री बिना आवश्यक दस्तावेज, कस्टम घोषणा या अनुमति के जीवित जानवरों को भारत लाते हैं। हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में वृद्धि को देखते हुए DGCA ने भारतीय कस्टम विभाग और एनिमल क्वारंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विसेज (AQCS) के साथ मिलकर यह नई व्यवस्था लागू की है। सर्कुलर के अनुसार अब किसी भी अवैध रूप से लाए गए जानवर को वापस भेजने का पूरा खर्च संबंधित एयरलाइन वहन करेगी। इसमें जानवर की देखभाल, ट्रांजिट के दौरान रखरखाव, आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया, परिवहन तथा वापसी से जुड़े सभी खर्च शामिल होंगे। DGCA ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी या किसी सरकारी एजेंसी पर इस प्रक्रिया का कोई वित्तीय या लॉजिस्टिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
DGCA ने सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे चेक-इन काउंटर, बोर्डिंग गेट और केबिन क्रू को भारतीय कस्टम नियमों, AQCS के प्रावधानों तथा अंतरराष्ट्रीय पशु परिवहन नियमों का विशेष प्रशिक्षण दें। इसके अलावा एयरलाइंस को अपने बुकिंग प्लेटफॉर्म और एयरपोर्ट टर्मिनलों पर स्पष्ट सूचना प्रदर्शित करनी होगी कि किन परिस्थितियों में जीवित जानवरों को भारत लाने की अनुमति है और किन मामलों में प्रतिबंध लागू है। नई गाइडलाइन के तहत एयरलाइंस को ऐसी आंतरिक व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे उड़ान रवाना होने से पहले बिना घोषित किए गए जीवित जानवरों की पहचान कर उन्हें रोका जा सके। DGCA का कहना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है और इसके लिए एयरलाइंस को अपनी स्क्रीनिंग प्रणाली और निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी। हालांकि हवाई मार्ग से जीवित जानवरों के परिवहन पर पहले से एरोनॉटिकल इन्फॉर्मेशन सर्कुलर (AIC) 9 ऑफ 1985 लागू है, लेकिन नए निर्देशों में ऐसे मामलों के लिए विस्तृत प्रक्रिया तय की गई है, जहां नियमों का उल्लंघन किया जाता है। किसी भी जानवर को उसके मूल स्थान पर वापस भेजने से पहले संबंधित एयरलाइन को भारतीय कस्टम और AQCS से आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होगी तथा इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के लाइव एनिमल्स रेगुलेशन का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा DGCA ने जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह भी अनिवार्य किया है कि डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने के सात कार्य दिवसों के भीतर संबंधित एयरलाइन DGCA को विस्तृत रिपोर्ट सौंपे, जिसमें पूरी प्रक्रिया, समय-सीमा, लॉजिस्टिक व्यवस्था और नियमों के पालन का पूरा विवरण शामिल हो।

