
बॉम्बे हाईकोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर पीठ का अहम आदेश; मूल उत्तर पुस्तिकाएं की जांच में NTA का परिणाम पाया गया सही
छत्रपति संभाजीनगर। Re-NEET परीक्षा के परिणाम में गड़बड़ी और गलत अंक दिए जाने का दावा करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर पीठ में दाखिल चार अलग-अलग याचिकाओं को अदालत ने गुरुवार को खारिज कर दिया। न्यायालय के समक्ष मूल उत्तर पुस्तिकाएं की जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि National Testing Agency (NTA) द्वारा घोषित परिणाम सही था और उसमें कोई त्रुटि नहीं थी। इन मामलों की सुनवाई न्यायमूर्ति नितिन बी.सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति ए.डी.शिंदे की खंडपीठ के समक्ष हुई।
चार विद्यार्थियों ने दी थी परिणाम को चुनौती
अदालत में Writ Petition No. 8384 of 2026 – Hricha D/o Prafull Deshpande Vs. Union of India & Ors., Writ Petition No. 8403 of 2026 – Soham S/o Nitin Gavate Vs. Union of India & Ors., Writ Petition No. 8420 of 2026 – Atharva S/o Narendra Jagtap Vs. Union of India & Ors. और Writ Petition Stamp No. 22172 of 2026 – Rahul S/o Aruna Nag Vs. Union of India & Ors. दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि Re-NEET परीक्षा में अंक देने की प्रक्रिया में त्रुटि हुई और NTA ने गलत परिणाम घोषित किया।
दिल्ली से सीलबंद लिफाफे में मंगाई गईं मूल उत्तर पुस्तिकाएं
याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांचने के लिए अदालत ने संबंधित विद्यार्थियों की मूल उत्तर पुस्तिकाएं दिल्ली से सीलबंद लिफाफे में मंगवाईं। अदालत ने स्वयं मूल उत्तर पुस्तिकाएं का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और अधिवक्ताओं को भी उत्तर पुस्तिकाएं देखने का अवसर दिया गया। इसके बाद सामने आया कि NTA द्वारा घोषित परिणाम और मूल उत्तर पुस्तिकाएं में दर्ज उत्तरों के बीच पूरा तालमेल था। इस आधार पर अदालत ने पाया कि परिणाम में त्रुटि होने संबंधी याचिकाकर्ताओं के दावे तथ्यात्मक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
केंद्र सरकार और NTA की ओर से रखी गई दलील
भारत सरकार और NTA की ओर से वरिष्ठ पैनल काउंसल अधिवक्ता रोहित सर्वज्ञ ने पक्ष रखा। अदालत के सामने मूल उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत कर NTA द्वारा घोषित परिणाम की शुद्धता के संबंध में दलीलें दी गईं। मूल दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत के समक्ष यह स्पष्ट हुआ कि NTA के परिणाम में कोई त्रुटि नहीं थी।
चारों याचिकाएं खारिज, ₹5-5 हजार का खर्च लगाया
रिकॉर्ड की जांच के बाद खंडपीठ ने चारों याचिकाओं को खारिज कर दिया और प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का खर्च (Costs) लगाया। अदालत के इस आदेश ने परीक्षा परिणाम से जुड़े विवादों में मूल उत्तर पुस्तिकाएं और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के महत्व को रेखांकित किया है।

