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अल्पसंख्यक विद्यार्थियों से व्यक्तिगत प्रमाणपत्र मांगने पर रोक, महाराष्ट्र सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों को दिए स्पष्ट निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र में शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान अल्पसंख्यक विद्यार्थियों से अलग से व्यक्तिगत अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र मांगना अनिवार्य नहीं होगा। राज्य सरकार के अल्पसंख्यक विकास विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शासन निर्णय में निर्धारित दस्तावेजों में से मान्य प्रमाण स्वीकार कर पात्र विद्यार्थियों को तत्काल प्रवेश दिया जाए। यह निर्देश ऐसे समय में जारी किए गए हैं जब शैक्षणिक वर्ष 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया चल रही है और सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ शैक्षणिक संस्थान विद्यार्थियों से व्यक्तिगत अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र की मांग कर रहे हैं।
सात समुदाय अल्पसंख्यक घोषित
महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जोरास्ट्रियन (पारसी), जैन और यहूदी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय घोषित किया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा नीति के अनुसार राज्य सरकार धार्मिक अथवा भाषाई अल्पसंख्यक समुदाय के किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत स्तर पर अलग से कोई अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र या दाखला जारी नहीं करती है। ऐसे में प्रवेश के लिए विद्यार्थी से इस तरह के अलग प्रमाणपत्र की अनिवार्य मांग नहीं की जानी चाहिए।
अल्पसंख्यक होने के लिए ये प्रमाण होंगे मान्य
अल्पसंख्यक विकास विभाग के अनुसार 1 जुलाई 2013 के शासन निर्णय के तहत निर्धारित प्रमाणों में से किसी एक को अल्पसंख्यक होने के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है:- स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (LC), प्रवेश रजिस्टर या अन्य स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज धर्म अथवा मातृभाषा।
यदि स्कूल रिकॉर्ड में ऐसी जानकारी दर्ज नहीं है तो संबंधित धर्मगुरु या पंजीकृत संस्था द्वारा जारी प्रमाणपत्र, जैसे बपतिस्मा प्रमाणपत्र, दीक्षा प्रमाणपत्र आदि।
अभिभावक का शपथपत्र (Affidavit)। इनमें से निर्धारित प्रमाण उपलब्ध होने पर विद्यार्थी से अलग व्यक्तिगत अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र की मांग नहीं की जानी चाहिए।
शिक्षा विभागों को दोबारा दिए गए कड़े निर्देश
इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए अल्पसंख्यक विकास विभाग ने 21 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुर्वेद संचालनालय के पुणे और मुंबई स्थित संबंधित निदेशकों को फिर से निर्देश दिए हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि दस्तावेजों को लेकर अनावश्यक प्रक्रिया के कारण किसी पात्र अल्पसंख्यक विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित न हो।
प्रमाणपत्र के अभाव में प्रवेश से वंचित न करें
अल्पसंख्यक विकास विभाग की सचिव डॉ. माधवी खोडे चवरे ने सभी अनुदानित और गैर-अनुदानित शैक्षणिक संस्थानों से निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र अल्पसंख्यक विद्यार्थी केवल व्यक्तिगत अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रवेश से वंचित नहीं रहना चाहिए। संस्थानों को शासन द्वारा निर्धारित वैकल्पिक प्रमाण स्वीकार कर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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