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कुपोषण के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार का फोकस, अधिक प्रभावित क्षेत्रों के लिए बनेगा विशेष एक्शन प्लान

पांच जिलों के आंगनवाड़ी केंद्रों की मंत्री अदिति तटकरे ने की समीक्षा, बुनियादी सुविधाएं 100 प्रतिशत सुनिश्चित करने के निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र में बच्चों को कुपोषण से बचाने और आंगनवाड़ी केंद्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने विशेष कार्ययोजना पर जोर दिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में कुपोषण का स्तर अधिक है, वहां जिला स्तर पर स्थिति का विश्लेषण कर विशेष एक्शन प्लान तैयार किया जाए। इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों में लंबित बुनियादी सुविधाओं के कार्यों को पूरा करने के लिए अगले तीन महीने की समयबद्ध कार्ययोजना बनाने को कहा गया है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में नंदुरबार, अमरावती के मेलघाट, गडचिरोली, पालघर (वसई को छोड़कर) और रायगढ़ के कर्जत-1 एवं 2 में एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS) के तहत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में बुनियादी ढांचे, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और जून 2026 के अंत तक बच्चों की पोषण स्थिति का जायजा लिया गया।
बच्चों के वजन और ऊंचाई मापने की दर 99 प्रतिशत से अधिक
समीक्षा के दौरान सामने आया कि बच्चों के वजन और ऊंचाई मापने की कार्यक्षमता 99 प्रतिशत से अधिक है। मंत्री तटकरे ने गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM), मध्यम तीव्र कुपोषण (MAM), कम वजन और अवरुद्ध शारीरिक वृद्धि (Stunting) के मामलों का जिलावार विश्लेषण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में इन श्रेणियों में कुपोषण का प्रमाण अधिक है, उनकी पहचान कर वहां विशेष उपाय किए जाएं, ताकि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाया जा सके।
आंगनवाड़ियों में सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश
मंत्री तटकरे ने आंगनवाड़ी केंद्रों में आवश्यक सुविधाओं की 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने बिजली और सौर ऊर्जा सुविधाओं का विस्तार करने तथा जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कुपोषित बच्चों के प्रबंधन और उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय मजबूत करने को भी कहा गया। बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों की इमारतों, बिजली एवं सौर ऊर्जा, पेयजल, शौचालय, चालू रसोईघर और बच्चों की वृद्धि मापने के लिए वजन मशीन, इन्फैंटोमीटर और स्टैडियोमीटर जैसे उपकरणों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।
पांचों जिलों में पेयजल की 100 प्रतिशत उपलब्धता
समीक्षा में बताया गया कि पांचों जिलों के आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल की 100 प्रतिशत उपलब्धता है। अधिकांश केंद्रों में शौचालय, रसोईघर और बच्चों के विकास की निगरानी के लिए आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में स्थायी बिजली कनेक्शन और सौर ऊर्जा सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता सामने आई है। मंत्री तटकरे ने इन कमियों को प्राथमिकता से दूर करने और लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. अनुप कुमार यादव, आयुक्त वर्षा लढ्ढा, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना की आयुक्त माधवी सरदेशमुख सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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