
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने गवर्नेंस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग (GPR) अभियान के तहत सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि 15 अगस्त तक इस अभियान में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जाए और प्रत्येक सेवा की समीक्षा कर आवश्यक दस्तावेजों की संख्या कम की जाए। सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य महाराष्ट्र को “देश में सबसे सरल सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने वाला राज्य” बनाना है। इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीपीआर के तहत प्रत्येक सेवा के लिए छह चरण निर्धारित किए गए हैं। सभी विभागों को 15 अगस्त तक कम से कम पांचवें चरण तक पहुंचकर आवश्यक शासनादेश जारी करते हुए सेवाओं को अंतिम परीक्षण के लिए तैयार रखना होगा। सरकार ने विभिन्न विभागों की सेवाओं का पुनर्मूल्यांकन कर दोहरे और अप्रासंगिक सेवाओं को समाप्त करने तथा सेवाओं का एकीकरण और सरलीकरण करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही महाडीबीटी 2.0, मैत्री और आपले सरकार 2.0 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चरणबद्ध तरीके से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने ‘डेटा एनालिटिक्स ऐज़ अ सर्विस’ और ‘मिनी सेतू केंद्र’ परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, सरकारी धन की बचत होगी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि गड़चिरोली जिले के माओवादी प्रभाव से मुक्त क्षेत्रों में ‘पुलिस दादालोरा खिड़की’ को ‘सेतू केंद्र’ में परिवर्तित किया जा रहा है, ताकि वहां के नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकें। यह पहल नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

