वसई-विरार में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, पांच गिरफ्तार

बिना मान्य डिग्री मरीजों का इलाज करने का आरोप, एलोपैथिक दवाएं और इंजेक्शन देने की भी जांच

इंद्र यादव
मुंबई।
वसई-विरार महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संतोष भुवन के भक्तिधाम इलाके में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि ये लोग बिना मान्य चिकित्सकीय डिग्री और पंजीकरण के मरीजों का इलाज कर रहे थे तथा एलोपैथिक दवाएं देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राकेश मानी उपाध्याय, अनिल यादव, डी.पी. यादव, प्रदीप कुमार पटेल और सुकांता उपेंद्र नायक के रूप में हुई है। मामले में तुलिंज पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई में 16 पंजीकृत डॉक्टरों की टीम शामिल रही, जिनमें डॉ. सुधीर पंढरे, डॉ. विक्रम राठौड़, डॉ. कृपाली फरडे, डॉ. तृप्ति कोकाटे और डॉ. रिद्धि पाटील सहित अन्य चिकित्सक शामिल थे। यह मामला केवल एक इलाके तक सीमित सवाल नहीं उठाता, बल्कि इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि बिना मान्य योग्यता के इलाज करने वाले लोग किस तरह आम नागरिकों की सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं। कई बार कम खर्च में इलाज की उम्मीद में मरीज ऐसे लोगों के पास पहुंच जाते हैं, लेकिन गलत दवा या इंजेक्शन से बीमारी गंभीर हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी चिकित्सक से इलाज कराने से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता और वैध पंजीकरण की जानकारी लेना जरूरी है। केवल क्लिनिक के बोर्ड या ‘डॉक्टर’ लिखे होने के आधार पर भरोसा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। वसई-विरार महानगरपालिका की कार्रवाई के बाद एक बार फिर नागरिकों से अपील की जा रही है कि संदिग्ध क्लिनिक या बिना वैध डिग्री इलाज करने वाले व्यक्ति की जानकारी स्वास्थ्य विभाग अथवा पुलिस को दें।
यह कार्रवाई फर्जी चिकित्सा प्रैक्टिस पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन ऐसे मामलों को नियंत्रित करने के लिए नियमित जांच के साथ नागरिक जागरूकता भी जरूरी है।

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