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दृष्टिहीन महिला क्रिकेटरों के संघर्ष और सफलता की कहानी है ‘देख ले! इंडिया’, लोकभवन में हुआ प्रदर्शन

मुंबई। दृष्टिहीन महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रेरणादायी सफर को दर्शाने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘देख ले! इंडिया’ का यूनिसेफ की ओर से गुरुवार को लोकभवन में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा की प्रमुख उपस्थिति में प्रदर्शन किया गया। राज्यपाल ने भारतीय दृष्टिहीन महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की सदस्यों के साथ डॉक्यूमेंट्री देखी और पूरी टीम तथा खिलाड़ियों की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि दृष्टिहीन खिलाड़ियों को सहानुभूति नहीं, बल्कि अवसर की आवश्यकता है। दृष्टिहीन महिला क्रिकेट टीम के संघर्षपूर्ण सफर और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उसकी जीत को दर्शाने वाली यह डॉक्यूमेंट्री बेहद प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि लोकभवन में इस डॉक्यूमेंट्री का एक और विशेष प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। डॉक्यूमेंट्री के निर्माता मुकुंद मूर्ति ने बताया कि इस फिल्म के माध्यम से समाज को यह जानने का अवसर मिलता है कि दृष्टिहीन महिला क्रिकेट खिलाड़ी विशेष प्रकार की आवाज करने वाली गेंद की मदद से क्रिकेट कैसे खेलती हैं। टीम की खिलाड़ी बेहद कठिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का सामना करते हुए आगे बढ़ी हैं और उनके उल्लेखनीय सफर को इस डॉक्यूमेंट्री में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल क्रिकेट की कहानी नहीं, बल्कि साहस, मित्रता और आत्मविश्वास की भी कहानी है। इन युवा खिलाड़ियों ने साबित किया है कि दृढ़ संकल्प के बल पर सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक सहित किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। भारतीय दृष्टिहीन महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की उपकप्तान गंगा कदम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि क्रिकेट ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस खेल ने उन्हें आत्मविश्वास, जिंदगी को नई दिशा और देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें इस बात का दुख होता था कि वह दूसरों की तरह पढ़ नहीं सकतीं, लेकिन आज उन्हें क्रिकेट खेलने पर गर्व है। यह फिल्म उनकी टीम के सफर की कहानी होने के साथ ही हर उस लड़की की कहानी है, जो तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। कार्यक्रम में टीम की खिलाड़ी प्रिया खीर और सुषमा पटेल भी उपस्थित थीं। क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया के अध्यक्ष तथा समर्थनम ट्रस्ट फॉर द डिसेबल्ड के संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी डॉ. महांतेश जी. किवडसन्नावर ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए क्रिकेट से पैदा हुए नए अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड इन इंडिया की पहल से अमेरिका की दृष्टिहीन क्रिकेट टीम का गठन किया गया और इस टीम ने विश्व कप प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया। उन्होंने इसे खेल जगत में भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का बेहतरीन उदाहरण बताया। 70 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के विभिन्न हिस्सों से आने वाली दृष्टिहीन महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड ब्लाइंड गेम्स तक पहुंचने के प्रेरणादायी सफर को दिखाया गया है। डॉक्यूमेंट्री में दृष्टिबाधित युवक-युवतियों की दृढ़ इच्छाशक्ति, समावेशिता और समान अवसरों के महत्व को प्रमुखता से दर्शाया गया है। इस अवसर पर यूनिसेफ महाराष्ट्र के क्षेत्रीय अधिकारी संजय सिंह, कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट स्वाती महापात्रा, खिलाड़ी प्रिया खीर और सुषमा पटेल तथा टीम मैनेजर शिखा शेट्टी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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