
मुंबई। महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले मराठी भाषी नागरिकों के न्यायोचित अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया कि सीमा क्षेत्र के मराठी भाषी नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास जारी रखेगी। बुधवार को विधानभवन में महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर गठित उच्चाधिकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, राज्यसभा सांसद शरद पवार, लोकसभा सांसद नारायण राणे, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई, चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ सहित कई मंत्री, सांसद, विधायक, विधि विशेषज्ञ और समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर कई वर्षों से संघर्ष जारी है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले की सुनवाई जल्द शुरू हो, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार आवश्यक कानूनी कदम उठाएगी और वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों की नियुक्ति करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में मराठी भाषी नागरिकों के खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों में महाराष्ट्र सरकार उन्हें सक्षम कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। इन मामलों की पैरवी के लिए अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाएगी और मुकदमों पर होने वाला पूरा खर्च महाराष्ट्र सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले मराठी भाषी नागरिक अनेक समस्याओं और कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में पूरा महाराष्ट्र उनके साथ मजबूती से खड़ा है। उच्चाधिकार समिति द्वारा दिए गए सभी सुझावों और लंबित मुद्दों पर राज्य सरकार गंभीरता से आवश्यक कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भाषाई अल्पसंख्यक आयोग से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां एकत्र कर महाराष्ट्र के सांसदों को उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद और मराठी भाषी नागरिकों से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी तरीके से उठाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वोच्च न्यायालय में सीमा विवाद की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आवेदन प्रस्तुत किया जाए। जरूरत के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाए और राज्य के विधि विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में मराठी भाषी नागरिकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए मंत्री समिति के माध्यम से एक प्रभावी समन्वय तंत्र भी स्थापित किया जाएगा।
सीमा क्षेत्र के मुद्दों के प्रति सरकार संवेदनशील: एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा क्षेत्र में रहने वाले मराठी भाषी नागरिकों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सीमा विवाद के समाधान और मराठी भाषी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र के नागरिकों के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) पूर्व प्रशिक्षण केंद्र में पांच प्रतिशत आरक्षण, इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटें और चिकित्सा शिक्षा में आरक्षित प्रवेश जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
सीमा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान जरूरी: नारायण राणे
लोकसभा सांसद नारायण राणे ने कहा कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा क्षेत्र में रहने वाले मराठी भाषी नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक रास्ता निकालने की आवश्यकता है। बैठक में विधायक जयंत पाटील, भास्कर जाधव, अधिवक्ता शिवाजी जाधव, महाधिवक्ता मिलिंद साठे, विशेषज्ञ समिति के सदस्य दिनेश ओऊळकर, मध्यवर्ती महाराष्ट्र एकीकरण समिति के कार्याध्यक्ष मनोहर किणेकर और प्रकाश मरगाळे ने भी सीमा विवाद से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे। बैठक में विधायक सुरेश खाडे, सुधीर गाडगीळ, सचिन कल्याण शेट्टी, रोहित आर. पाटील, राज्य नियोजन मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश क्षीरसागर, शशिकांत शिंदे, शिवाजी पाटील, गोपीचंद पडळकर और सदाभाऊ खोत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश गुप्ता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव वेणुगोपाल रेड्डी, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव अतुल पाटणे, मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी सहित वरिष्ठ अधिकारी, विधि विशेषज्ञ और समिति के सदस्य उपस्थित थे।



