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2022 छात्रवृत्ति घोटाले की जांच तेज करने के निर्देश: 830 संस्थानों के मामले सीबीआई के पास, 60 हजार से अधिक मामलों की जांच पूरी होने के बाद ही छात्रवृत्ति योजना होगी बहाल

मुंबई। वर्ष 2022 में छात्रवृत्ति योजनाओं में निधि के दुरुपयोग के मामलों के बाद 830 शैक्षणिक संस्थानों के प्रकरण केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआईI) को तथा 60 हजार से अधिक मामलों को विभिन्न राज्यों के पास जांच के लिए भेजा गया है। जब तक इन मामलों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं को पूर्ण क्षमता के साथ दोबारा शुरू करना संभव नहीं होगा। इसलिए राज्यों को जांच प्रक्रिया में तेजी लाकर लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी सोमवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के उप सचिव (छात्रवृत्ति) सुदीप दत्ता ने मुंबई में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में दी। केंद्र सरकार की प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़े लंबित जांच मामलों की समीक्षा तथा योजनाओं को दोबारा प्रभावी ढंग से शुरू करने के उद्देश्य से भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई के सचिवालय जिमखाना में क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव के अधिकारियों ने भाग लिया। महाराष्ट्र की अल्पसंख्यक विकास विभाग की सचिव डॉ. माधवी खोडे चव्हारे भी उपस्थित थीं।
उप सचिव सुदीप दत्ता ने बताया कि राज्यों की प्रगति की समीक्षा के साथ जांच एजेंसियों के सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि मामलों का निपटारा होने के बाद छात्रवृत्ति योजनाओं को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग, कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा।
उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक छात्रवृत्ति निधि के दुरुपयोग की वसूली के लिए प्रभावी कार्रवाई करें, आवश्यकता पड़ने पर बैंकों का सहयोग लें और वसूली नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराएं। साथ ही 1 से 15 अगस्त के बीच सभी मामलों की क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि तय समयसीमा में कार्रवाई पूरी हो जाती है तो छात्रवृत्ति योजनाओं को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी। अल्पसंख्यक विकास विभाग की सचिव डॉ. माधवी खोडे चव्हारे ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज का विकास सकारात्मक दृष्टिकोण और प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर छात्रवृत्ति योजनाओं को नए सिरे से प्रभावी ढंग से लागू करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने इस कार्यशाला के आयोजन के लिए महाराष्ट्र का चयन किए जाने पर भारत सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि लंबित मामलों के अंतिम निपटारे के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा गृह विभाग के संयुक्त प्रयासों से मामलों का शीघ्र निपटारा कर छात्रवृत्ति योजनाओं को पुनः शुरू करने की दिशा में तेजी से कार्य करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला के समापन पर उप सचिव सुदीप दत्ता ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

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