
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई गुलाबी (पिंक) ई-रिक्शा योजना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधान परिषद में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में कम से कम 5,000 महिलाओं को इस योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।विधान परिषद सदस्य चित्रा वाघ द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री तटकरे ने बताया कि पहले चरण का लक्ष्य पूरा होने के बाद इस योजना का विस्तार नगर परिषदों सहित राज्य के अन्य शहरों में भी किया जाएगा। वर्ष 2024 में पायलट परियोजना के रूप में पुणे, नासिक, नागपुर, अहिल्यानगर, अमरावती, छत्रपति संभाजीनगर, कोल्हापुर और सोलापुर सहित आठ प्रमुख शहरों में इस योजना की शुरुआत की गई थी।उन्होंने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिला यात्रियों को सुरक्षित परिवहन सुविधा देना है। इसी कारण यह अनिवार्य किया गया है कि ई-रिक्शा केवल महिला ही चलाएगी। हालांकि, कई आवेदकों ने स्वयं वाहन चलाने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति से चलवाने की इच्छा जताई, जिसके कारण कई लोगों ने आवेदन वापस ले लिए।मंत्री तटकरे ने बताया कि अब तक 130 गुलाबी ई-रिक्शाओं का वितरण किया जा चुका है और वे सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। योजना के तहत ई-रिक्शा की लागत का 20 प्रतिशत अनुदान सरकार, 70 प्रतिशत बैंक ऋण तथा 10 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान रखा गया है, ताकि लाभार्थियों की जिम्मेदारी और योजना के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहे।उन्होंने बताया कि महिला चालकों के प्रशिक्षण, चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जिम्मेदारी आपूर्तिकर्ता कंपनी को सौंपी गई है तथा प्रशिक्षण के लिए महिलाओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। परिवहन विभाग के साथ समन्वय कर ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाएगी।मंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को बार-बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता वाली समितियों के माध्यम से अब तक 9,940 आवेदन प्राप्त हुए हैं। सरकार जनजागरूकता, प्रशिक्षण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए इस योजना के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यमंत्री ने बताया कि 2 जुलाई को साकीनाका में 55 वर्षीय असलम इसाक शेख खुले सीवर मैनहोल में गिर गए थे। बाद में उनका शव घटना स्थल से करीब 100 फीट दूर सीवर लाइन के दूसरे मैनहोल से अग्निशमन दल ने बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी मैनहोल, उनके ढक्कन और सुरक्षा जालियों की जांच एवं मरम्मत के लिए महानगरपालिका प्रशासन को कई बार निर्देश दिए गए थे। इस संबंध में समीक्षा बैठकें भी आयोजित की गई थीं। संबंधित मैनहोल पर सुरक्षा जाली लगाने के लिए ठेकेदार ने वाहन, सामग्री और श्रमिक भी उपलब्ध कराए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठेकेदार के कर्मचारियों ने जाली लगाने के लिए मैनहोल का ढक्कन खोल दिया था, लेकिन उसी दौरान एक राहगीर खुले मैनहोल में गिर गया। सीसीटीवी फुटेज में यह भी स्पष्ट हुआ कि कार्यस्थल पर आवश्यक बैरिकेटिंग और ट्राइपॉड जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी। इससे स्पष्ट है कि कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ। राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि घटना की विस्तृत जांच के लिए गठित समिति दुर्घटना के कारणों, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
उन्होंने बताया कि मानसून से पहले पूरा किया जाना वाला काम समय पर नहीं करने, सुरक्षा उपायों की अनदेखी करने तथा पर्याप्त निगरानी नहीं रखने के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए सहायक आयुक्त धनाजी हेरलेकर, सहायक द्वितीय अभियंता दीपक चौगुले, कनिष्ठ अभियंता अभिजित चौगुले और सहायक अभियंता उत्तम पाटील को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। राज्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रहने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ स्थानीय पुलिस थाने में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र के सभी मैनहोलों की अगले आठ दिनों के भीतर 100 प्रतिशत जांच कर उनकी सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश सभी अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्तों, सात परिमंडलीय उपायुक्तों तथा 26 वार्डों के सहायक आयुक्तों को दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



