बीएमसी H/पश्चिम में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
बांद्रा पश्चिम की समरविले बिल्डिंग में हुए अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं, नमन करानिया की दोबारा H/पश्चिम वार्ड में नियुक्ति और विजिलेंस विभाग की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल
रिश्वतखोरी में लिप्त है बीएमसी एच/पश्चिम का कनिष्ठ अभियंता आकाश पाटील व डीओ नमन करानिया?

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के विभिन्न वार्डों में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें कथित संरक्षण देने और मोटी वसूली के मामले लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। मुंबई शहर और उपनगरों में बड़ी संख्या में अवैध निर्माणों को नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना बीएमसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए प्रत्येक वार्ड में पदनिर्देशित अधिकारियों (डीओ) की नियुक्ति की गई है। इमारत एवं कारखाना विभाग के अभियंताओं पर बीएमसी हर महीने करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में सहायक आयुक्तों और संबंधित अभियंताओं की जवाबदेही तय करना आवश्यक हो गया है। ताजा मामला बीएमसी एच/पश्चिम विभाग के बांद्रा पश्चिम स्थित 14वें और 33वें रोड जंक्शन, लिंकिंग रोड के पास समरविले बिल्डिंग में एनएम मेडिकल सेंटर के नीचे का है। इमारत के भूतल पर स्थित खुली जगह में अतिक्रमण और निर्माण नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। अग्निसुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी का भी मुद्दा उठाया गया है। शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कनिष्ठ अभियंता आकाश पाटील, पदनिर्देशित अधिकारी नमन करानिया और सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवार की भूमिका सवालों के घेरे में है। इस पूरे मामले में निष्पक्षता बरतते हुए दैनिक स्वर्णिम प्रदेश की ओर से बीएमसी H/पश्चिम विभाग के सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवाड, पदनिर्देशित अधिकारी नमन करानिया और कनिष्ठ अभियंता आकाश पाटील से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि, तीनों अधिकारियों ने फोन का उत्तर नहीं दिया। इसके बाद भी उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ।सवाल यह है कि संबंधित अधिकारियों ने निर्माण की वैधता और अग्निसुरक्षा नियमों की जांच कर अब तक क्या कार्रवाई की?
नमन करानिया की नियुक्ति में राजनीतिक सिफारिश
नमन करानिया की नियुक्ति में राजनीतिक सिफारिश का मामला भी महत्वपूर्ण है। करानिया इससे पहले बीएमसी एच/पश्चिम विभाग में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत थे। 20 दिसंबर 2020 को तत्कालीन महापौर किशोरी पेडणेकर ने संचालक को पत्र लिखकर सिफारिश की थी जिसके बाद उन्हें सिटी इंजीनियर कार्यालय से एच/पश्चिम विभाग में नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज दैनिक स्वर्णिम प्रदेश के पास मौजूद हैं। बाद में पदोन्नति मिलने के बाद करानिया दोबारा इसी वार्ड में पदनिर्देशित अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए। सवाल उठता है कि आखिर एक ही अधिकारी को पदोन्नति के बाद फिर उसी वार्ड में नियुक्त करने के पीछे क्या प्रशासनिक कारण थे? क्या दोबारा नियुक्ति में भी किसी राजनीतिक सिफारिश की भूमिका रही?
बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे से सीधे सवाल
समरविले बिल्डिंग का मामला बीएमसी H/पश्चिम विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। सवाल यह है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और संबंधित अधिकारियों ने अब तक क्या कदम उठाए? क्या बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे इस मामले में सहायक आयुक्त दिनेश पल्लेवाड, पदनिर्देशित अधिकारी नमन करानिया और कनिष्ठ अभियंता आकाश पाटील से जवाब मांगेंगी? क्या समरविले बिल्डिंग के भूतल पर किए गए निर्माण की स्वीकृत योजना, संबंधित अनुमतियों और अग्निसुरक्षा नियमों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी? क्या नमन करानिया की नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा होगी?
वहीं, बीएमसी के विजिलेंस विभाग की कार्यप्रणाली भी गंभीर सवालों के घेरे में है। अक्सर देखा जाता है कि किसी अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस विभाग में शिकायत करने पर जांच के लिए शिकायत उसी विभाग या संबंधित अधिकारी के पास भेज दी जाती है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे संभव होगी? आखिर विजिलेंस विभाग स्वतंत्र रूप से जांच क्यों नहीं करता? क्या उसे हर मामले में महानगरपालिका आयुक्त या अतिरिक्त आयुक्त के आदेश का इंतजार करना पड़ता है?
