
मुंबई। महाराष्ट्र देश में सर्वाधिक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि प्राप्त करने वाला राज्य है और इस निधि के प्रभावी, पारदर्शी तथा सुव्यवस्थित उपयोग के लिए राज्य सरकार ‘स्टेट CSR’ प्रकोष्ठ की स्थापना करेगी। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्षा निवास पर छठे राज्य वित्त आयोग के संबंध में आयोजित प्रस्तुतीकरण बैठक में यह निर्देश देते हुए कहा कि इस प्रकोष्ठ के माध्यम से स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को उपलब्ध होने वाली CSR निधि का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में वित्त एवं नियोजन राज्यमंत्री आशीष जयसवाल भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की ब्याजमुक्त ऋण योजना की तर्ज पर स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के लिए भी ऐसी योजना तैयार करने और विकास कार्यों हेतु ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने गांवठाण सीमा से सटे बाहरी क्षेत्रों में निर्माण अनुमति प्रदान करने के लिए विशेष व्यवस्था विकसित करने तथा इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने पर जोर दिया, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित रहे तथा स्थानीय संस्थाएं अपने अधिकारों का दुरुपयोग न कर सकें। मुख्यमंत्री ने अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ग्राम पंचायत सीमा के बाहर हो रहे अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भी ठोस तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी संपत्तियों की मैपिंग कराने तथा स्वामित्व योजना का विस्तार करते हुए गांवठाण सीमा के बाहर स्थित संपत्तियों को भी इसके दायरे में लाने पर बल दिया। बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग की 42 सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिनमें संस्थागत सुधार, स्थानीय निकायों के लिए राजस्व स्रोतों का सृजन, कर निर्धारण एवं नियंत्रण, राज्य निधि का वितरण, स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को वित्तीय हस्तांतरण तथा वित्त आयोग को अधिक सक्षम बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। बैठक में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव ओ. पी. गुप्ता, विकास खारगे, संजय सेठी, विनीता वेद सिंगल, सचिव शैला ए. सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव (वित्तीय सुधार) विकास चंद्र रस्तोगी ने आयोग की सिफारिशों और प्रस्तावित सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।



