
मुंबई। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र ग्रामीण पेयजल नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस महत्वपूर्ण नीति को स्वीकृति प्रदान की गई। नई नीति के तहत जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत संचालित जल योजनाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सरकार के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विभिन्न जल योजनाओं का एकीकरण कर नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित, कीटाणुरहित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। नई और पुरानी जल योजनाओं की समीक्षा कर उनकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट का स्थायी समाधान हो सके।यह नीति ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है। इसके माध्यम से वर्ष 2047 तक राज्य के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सतत, स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीति के तहत अल्पकालीन, मध्यमकालीन और दीर्घकालीन योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसके माध्यम से सभी ग्रामीण नागरिकों को समान रूप से 100 प्रतिशत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही गांवों को जल आत्मनिर्भर बनाने, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने जल चोरी रोकने, जल योजनाओं का संचालन ग्राम स्वास्थ्य, पोषण, जलापूर्ति एवं स्वच्छता समितियों या सामाजिक संस्थाओं को सौंपने, सामाजिक रूप से वंचित एवं कमजोर वर्गों को जल एवं स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। बहु-ग्राम जलापूर्ति योजनाओं में SCADA प्रणाली लागू की जाएगी तथा जल एवं स्वच्छता परिसंपत्तियों की रियल-टाइम निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। जीआईएस और डैशबोर्ड आधारित शिकायत एवं सेवा निगरानी व्यवस्था भी लागू की जाएगी। नई नीति के तहत स्वतंत्र और क्षेत्रीय नल जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव के लिए रखरखाव निधि और कॉर्पस फंड का गठन ग्राम पंचायत, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण तथा जिला परिषद स्तर पर किया जाएगा। यह निधि जल योजनाओं के रखरखाव और मरम्मत कार्यों में उपयोग की जाएगी। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के लिए तीन स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसके लिए ‘नल जल सेवा’ मोबाइल एप और ‘नल जल मित्र’ जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। साथ ही राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के अंतर्गत एक केंद्रीय जल प्रबंधन प्रणाली और समग्र डिजिटल कमांड एवं नियंत्रण व्यवस्था विकसित की जाएगी। जल योजनाओं की बिलिंग, वसूली और रखरखाव कार्य तीसरी संस्था को भी सौंपे जा सकेंगे। इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों और प्राथमिक कृषि सहकारी संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। नीति के अनुसार जल योजनाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए रखरखाव लागत के आधार पर जल शुल्क निर्धारित किया जाएगा। शुल्क तय करते समय गांव की जनसंख्या, लाभार्थी परिवारों की संख्या, परिवार के सदस्यों की संख्या तथा पशुधन जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाएगा। मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण घरेलू जल उपभोक्ताओं के लिए न्यूनतम 150 रुपये और अधिकतम 400 रुपये प्रति परिवार प्रति माह जल शुल्क निर्धारित करने को मंजूरी दी है। यदि किसी योजना का वास्तविक रखरखाव खर्च इससे अधिक आता है, तो उसी के अनुसार शुल्क वसूला जा सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जल शुल्क की 100 प्रतिशत वसूली संबंधित स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के लिए अनिवार्य होगी। यदि जल शुल्क से रखरखाव खर्च पूरा नहीं होता है, तो उस कमी को पूरा करने के लिए 15वें और 16वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त निधि का उपयोग किया जा सकेगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस नीति के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत, पारदर्शी और टिकाऊ बनेगी तथा भविष्य में जल संकट की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।



