
मुंबई। महाराष्ट्र में लगातार बढ़ती वाहन संख्या, नागरिकों की बढ़ती जरूरतों और परिवहन विभाग पर बढ़ते प्रशासनिक दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने नए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) और उप-क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (Sub-RTO) स्थापित करने के लिए नए मानदंड निर्धारित किए हैं। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि इसका उद्देश्य नागरिकों को परिवहन विभाग की सेवाएं अधिक तेज, सुगम और उनके नजदीक उपलब्ध कराना है। मंगलवार को मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है और उसमें की गई सिफारिशों को सैद्धांतिक मंजूरी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि राज्य के दूरस्थ तथा तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन निरीक्षण, कर भुगतान और अन्य सेवाओं के लिए दूर-दराज स्थित कार्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नई कार्यालय व्यवस्था से इन सेवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराया जा सकेगा। सरकार द्वारा निर्धारित नए मानदंडों के अनुसार किसी नए परिवहन कार्यालय की स्थापना के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में कम से कम चार तालुके, पांच लाख से अधिक वाहन, सात लाख से अधिक जनसंख्या तथा 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक राजस्व होना आवश्यक होगा। इसके अलावा वर्तमान परिवहन कार्यालय से 50 किलोमीटर से अधिक दूरी वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। मंत्री सरनाईक ने कहा कि जिन स्थानों पर पूर्ण आरटीओ कार्यालय स्थापित करना आवश्यक नहीं होगा, वहां नागरिकों की सुविधा के लिए स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र (ATS) और स्वचालित वाहन चालक परीक्षण केंद्र (ADTT) स्थापित किए जाएंगे। इससे वाहन परीक्षण और ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना है। वाहन संख्या में हुई बड़ी वृद्धि को देखते हुए परिवहन विभाग की व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाना आवश्यक हो गया है। नए आरटीओ और उप-आरटीओ कार्यालयों के शुरू होने से लोगों का समय बचेगा, अनावश्यक खर्च कम होगा और सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि नए कार्यालयों की स्थापना से प्रशासनिक सुविधाओं में वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आधुनिक तकनीक आधारित सेवा केंद्रों के माध्यम से परिवहन प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकेगा।



