जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति रहेगी जारी: आयुक्त तुकाराम मुंढे

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने अवैध दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब भ्रामक दावे करने वाले, नियमों का उल्लंघन करने वाले और बिना लाइसेंस के निर्मित सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक्स) के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। सातारा, मुंबई में की गई अलग-अलग कार्रवाई में कुल 34.61 लाख रुपये मूल्य के सौंदर्य प्रसाधन, कच्चा माल और मशीनरी जब्त अथवा प्रतिबंधित की गई है। एफडीए के महाराष्ट्र के सह आयुक्त (औषध) ने बताया कि विभाग को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर 12 जून 2026 को सातारा जिले के कराड स्थित राजलक्ष्मी टेलीकम्युनिकेशन प्रतिष्ठान की जांच की गई। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में सौंदर्य प्रसाधन बिक्री के लिए रखे हुए पाए गए। निरीक्षण में सामने आया कि कई उत्पादों के बाहरी पैकेट पर बैच नंबर और निर्माण तिथि दर्ज थी, लेकिन अंदर की बोतलों पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और निर्माता का नाम अंकित नहीं था। कुछ उत्पादों पर लाइसेंस नंबर तो था, लेकिन निर्माता की जानकारी उपलब्ध नहीं थी। प्रारंभिक जांच में इन उत्पादों को मिसब्रांडेड कॉस्मेटिक्स पाया गया। इसके चलते करीब 29.45 लाख रुपये मूल्य के उत्पादों का स्टॉक प्रतिबंधित कर दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इसके बाद 13 जून 2026 को मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट स्थित ब्यूटी सेंटर पर छापेमारी की गई। जांच के दौरान कई कॉस्मेटिक उत्पादों पर आवश्यक वैधानिक जानकारी का अभाव पाया गया। इनमें शरीर के विभिन्न अंगों के आकार बढ़ाने, वजन और चर्बी कम करने तथा त्वचा की सुंदरता बढ़ाने जैसे दावे करने वाले उत्पाद शामिल थे। बैच नंबर, लाइसेंस नंबर और निर्माता संबंधी जानकारी अधूरी होने तथा भ्रामक दावे किए जाने के कारण 1.20 लाख रुपये मूल्य का स्टॉक जब्त किया गया। साथ ही साथ मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) स्थित रेडियंट क्रिएशन्स नामक इकाई पर भी कार्रवाई की गई। जांच में बिना वैध लाइसेंस के कॉस्मेटिक्स और अन्य उत्पादों का निर्माण तथा भंडारण किए जाने का खुलासा हुआ। मौके से उत्पादन में उपयोग होने वाला कच्चा माल और मशीनरी भी बरामद की गई। इस कार्रवाई में 3.96 लाख रुपये मूल्य का माल जब्त किया गया है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी रहेगी। भ्रामक, घटिया गुणवत्ता वाले या बिना लाइसेंस के उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और सुरक्षित उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।




