HomeHealth & Fitnessमहाराष्ट्र में गुटखा माफियाओं पर अब लगेगा मकोका

महाराष्ट्र में गुटखा माफियाओं पर अब लगेगा मकोका

एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के सख्त निर्देश

मकोका के जरिए तोड़ी जाएगी अवैध सप्लाई चेन


मुंबई। महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के संगठित अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। शुक्रवार को एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्यभर के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गुटखा, तंबाकू, निकोटीनयुक्त पान मसाला तथा अन्य प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री से जुड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ पात्र मामलों में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), 1999 के तहत कार्रवाई की जाए। संविधान के अनुच्छेद 47 के अनुसार नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों के सेवन पर रोक लगाना राज्य की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत महाराष्ट्र में गुटखा, तंबाकू और निकोटीनयुक्त पान मसाला जैसे उत्पादों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर इन प्रतिबंधित उत्पादों का संगठित और लाभ कमाने के उद्देश्य से अवैध कारोबार जारी रहने के मामले सामने आए हैं। एफडीए, पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई में यह पाया गया है कि ऐसे मामलों में केवल छोटे विक्रेता ही नहीं, बल्कि निर्माता, आपूर्तिकर्ता, वित्तपोषक, परिवहनकर्ता, गोदाम संचालक, थोक विक्रेता और अन्य सहयोगी तत्व भी एक संगठित नेटवर्क के रूप में कार्य करते हैं। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज, नकली बिल, बेनामी लेनदेन, डमी कंपनियां, गुप्त गोदाम और अंतरराज्यीय आपूर्ति श्रृंखला का उपयोग किया जाता है। इसलिए ऐसे मामलों को केवल खाद्य सुरक्षा कानून के उल्लंघन तक सीमित न रखते हुए संगठित अपराध के दृष्टिकोण से भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 59 के तहत असुरक्षित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण और बिक्री के लिए कारावास का प्रावधान है, जबकि धारा 64 में अपराध की पुनरावृत्ति होने पर अधिक कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं, मकोका के तहत यदि कोई दंडनीय अपराध तीन वर्ष या उससे अधिक की सजा वाला हो, पिछले दस वर्षों में एक से अधिक आरोपपत्र दायर किए गए हों और दो या अधिक व्यक्ति आर्थिक लाभ के लिए संगठित रूप से कार्यरत हों, तो ऐसे मामलों में मकोका लागू करने की पात्रता की जांच की जाएगी।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों से संबंधित प्रत्येक कार्रवाई में मकोका लागू होने की संभावना का परीक्षण किया जाए। पात्रता सिद्ध होने पर खाद्य सुरक्षा कानूनों के साथ-साथ मकोका के तहत भी कार्रवाई करने के लिए पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। हालांकि मकोका लागू करने के लिए कानून में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे नेटवर्क को निशाना बनाया जाएगा। निर्माता, वित्तपोषक, बड़े आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता, गोदाम संचालक, थोक और खुदरा विक्रेताओं की पूरी श्रृंखला की पहचान कर उनके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे अवैध कारोबार के वास्तविक सूत्रधारों और आर्थिक लाभार्थियों तक पहुंचना संभव होगा। राज्यभर में ऐसे मामलों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष अभिलेख तैयार किए जाएंगे, जिनमें एफआईआर, आरोपपत्र, न्यायालयीन आदेश, जब्ती कार्रवाई और अंतिम निर्णयों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इन मामलों की नियमित समीक्षा कर मासिक रिपोर्ट आयुक्त कार्यालय को भेजी जाएगी। मकोका के अंतर्गत दर्ज मामलों में जमानत का प्रभावी विरोध करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सरकारी अभियोजकों, पुलिस और एफडीए अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर न्यायालय में आवश्यक साक्ष्य और तथ्य प्रस्तुत किए जाएंगे। एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं गुटखा, तंबाकू, निकोटीनयुक्त पान मसाला या अन्य प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों का उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण या बिक्री हो रही हो, तो इसकी जानकारी तत्काल स्थानीय अन्न एवं औषध प्रशासन कार्यालय अथवा पुलिस को दें। आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन करने वाले व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए संगठित तरीके से प्रतिबंधित उत्पादों का कारोबार करने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और नेटवर्क के खिलाफ कठोर, साक्ष्य आधारित और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू का अवैध व्यापार केवल खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के विरुद्ध गंभीर संगठित अपराध माना जाएगा।

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