Wednesday, May 27, 2026
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बाल विवाह रोकने की बड़ी पहल: ऊसतोड़ मजदूर परिवारों की बेटियों को बालगृह में रखेगी महाराष्ट्र सरकार

मुंबई। ऊसतोड़ (गन्ना कटाई) के लिए पलायन करने वाले परिवारों की बेटियों में बढ़ते बाल विवाह के मामलों को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने जानकारी दी कि ऊसतोड़ के लिए बाहर जाने वाले परिवारों की लड़कियों को चार महीने की अवधि के लिए बालगृह में रखने का निर्णय लिया जा रहा है। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना तथा राज्य महिला आयोग के कामकाज की समीक्षा करते हुए मंत्री तटकरे ने कहा कि बड़ी संख्या में परिवारों के पलायन के कारण कई लड़कियां शिक्षा से वंचित हो जाती हैं। कई स्थानों पर नाबालिग लड़कियों के विवाह के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों की लड़कियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, उनकी शिक्षा जारी रखने तथा स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें अस्थायी रूप से बालगृह में रखने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
योजनाओं को बनाया जाएगा अधिक प्रभावी
बैठक में मंत्री तटकरे ने विभागीय कामकाज को अधिक परिणामकारक बनाने के लिए “टार्गेट ओरिएंटेड” कार्यक्रमों पर जोर देने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुक्त कार्यालय के नवीनीकरण, कंप्यूटर खरीद और योजनाओं के गहन अध्ययन के बाद निर्णय लेने की आवश्यकता भी बताई।
महिला आयोग को मिलेगा अधिक निधि
मंत्री तटकरे ने कहा कि राज्य महिला आयोग के कार्यक्षेत्र को बढ़ाने के लिए निधि में वृद्धि की गई है। महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और वंचित वर्ग तक पहुंचे, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आषाढ़ी वारी के दौरान महिलाओं के लिए विशेष जनजागरण और सहायता कार्यक्रम चलाने की भी योजना बनाई जा रही है।
किसान आत्महत्या प्रभावित महिलाओं के लिए विशेष उपक्रम
बैठक में किसान आत्महत्या प्रभावित परिवारों की विधवा महिलाओं के लिए Naam Foundation के समन्वय से विशेष कार्यक्रम चलाने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में राज्य के 12 आदिवासी जिलों में गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों के लिए छह महीने का विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय भी लिया गया। इसके तहत विशेषज्ञों की मदद से अध्ययन कर ठोस उपाययोजनाएं तय की जाएंगी।

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