
पालघर/इंद्र यादव। मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर धानीवरी के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे पालघर जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों की खुशियों को उजाड़ देने वाली त्रासदी बन गया। हादसे में जान गंवाने वाले 12 स्थानीय निवासियों का बापूगांव में सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया, जहां एक साथ 12 चिताएं जलने का दृश्य देखकर पूरा गांव रो पड़ा।श्मशान घाट पर जैसे ही एक के बाद एक चिताओं को मुखाग्नि दी गई, वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। हर तरफ चीख-पुकार, सिसकियां और मातम का माहौल था। अपनों को खो चुके परिवारों का दर्द देखकर गांव ही नहीं, पूरा इलाका गम में डूब गया।इस दुखद घड़ी में मृतकों को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग बापूगांव पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई जनप्रतिनिधि भी पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने पहुंचे। महाराष्ट्र सरकार में आदिवासी विकास मंत्री Ashok Uike ने शोकाकुल परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। स्थानीय सांसदों और विधायकों ने भी पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।हादसे में घायल हुए 17 लोग अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए वेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें बचाने के लिए युद्ध स्तर पर इलाज जारी है।इस भीषण हादसे ने एक बार फिर मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार भारी वाहनों के खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद सुरक्षा इंतजामों को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 12 लोगों की एक साथ मौत के बाद पूरे पालघर जिले में शोक और आक्रोश का माहौल है, जबकि लोग अब सुरक्षित सड़कों और सख्त यातायात व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।




