Monday, May 18, 2026
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बुरोंडी में मछुआरा जेट्टी निर्माण को मिलेगी गति, सरकार सकारात्मक: मंत्री नितेश राणे

मुंबई। रत्नागिरी जिले के दापोली तालुका के बुरोंडी गांव में मछुआरा जेट्टी निर्माण के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने गति देने का निर्णय लिया है। सोमवार को मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने कहा कि बुरोंडी क्षेत्र के मछुआरों की समस्याओं, जेट्टी निर्माण की आवश्यकता और मत्स्य व्यवसाय के विकास के लिए सरकार सकारात्मक रूप से कार्य कर रही है। बुरोंडी (ता. दापोली) मछुआरा जेट्टी से संबंधित आयोजित बैठक में मंत्री नितेश राणे बोल रहे थे। इस बैठक में पूर्व विधायक सूर्यकांत दळवी, महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पी., मत्स्य व्यवसाय आयुक्त प्रेरणा देशभ्रतार, केदार साठे, शिवानी गावकर, स्थानीय मछुआरा संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री नितेश राणे ने कहा कि रत्नागिरी जिला महाराष्ट्र का एक महत्वपूर्ण समुद्री जिला है, जिसे लगभग 237 किलोमीटर लंबा समुद्री तट प्राप्त है। मिरकरवाडा बंदरगाह के बाद दापोली तालुका का हर्णे बंदर विशेष महत्व रखता है। हर्णे, दाभोल और बुरोंडी प्रमुख मछली उतार केंद्र माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि बुरोंडी के मछुआरों की समस्याएं सरकार के संज्ञान में आई हैं और मछुआरों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बुरोंडी में जेट्टी बनने से परिवहन खर्च कम होगा, मछलियों की गुणवत्ता सुरक्षित रहेगी और स्थानीय मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मंत्री राणे ने बताया कि जेट्टी निर्माण से मछुआरों को सीधे मछली उतारने की सुविधा मिलेगी। साथ ही डीजल, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। खराब मौसम और तूफानी परिस्थितियों में नौकाओं को सुरक्षित आश्रय भी मिलेगा। इसके अलावा पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (एफआईडीएफ) योजना के तहत हर्णे मत्स्य बंदर विकास कार्य जारी है और उसी तर्ज पर बुरोंडी में भी आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस परियोजना से दापोली तालुका के मत्स्य व्यवसाय को बड़ी गति मिलेगी। बैठक में जानकारी दी गई कि बुरोंडी एक बड़ा मछुआरा गांव है, जिसकी आबादी लगभग 7 से 8 हजार के बीच है। यहां पंजीकृत मछुआरा सहकारी संस्था कार्यरत है, जिससे 2502 सदस्य जुड़े हुए हैं। बुरोंडी क्षेत्र में लगभग 100 पंजीकृत मछली पकड़ने वाली नौकाएं हैं, जिनमें एक और दो सिलेंडर वाली नौकाओं की संख्या अधिक है।

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