
मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने उम्मीदवार के तौर पर अंबादास दानवे के नाम का ऐलान कर दिया है। यह घोषणा पूर्व मंत्री और विधायक आदित्य ठाकरे ने की, जबकि पार्टी के सांसद संजय राउत ने बताया कि इस उम्मीदवारी को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंजूरी दी है। दानवे अब एक बार फिर विधान परिषद में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैदान में उतरेंगे और जल्द ही नामांकन दाखिल करेंगे। अंबादास दानवे पहले अगस्त 2019 से अगस्त 2025 तक विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं और अगस्त 2022 से उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली थी। शिवसेना में विभाजन के बाद भी उनकी उद्धव ठाकरे के प्रति निष्ठा कायम रही, जिसे इस निर्णय में अहम माना जा रहा है।
इस सीट के लिए सुषमा अंधारे और राजन विचारे जैसे नामों की भी चर्चा थी, लेकिन अंततः पार्टी ने दानवे पर भरोसा जताया। राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो विधान परिषद की कुल 9 सीटों के लिए चुनाव होना है। एक सीट जीतने के लिए 29 वोटों की जरूरत होती है। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की मौजूदा ताकत लगभग 46 वोटों तक पहुंचती है, जिसमें कांग्रेस के 16 विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के 10 विधायक शामिल हैं, जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पास 20 विधायक हैं। इस लिहाज से दानवे की जीत की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, गठबंधन के भीतर खींचतान भी सामने आई है। कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट की ओर से यह इच्छा जताई गई थी कि उद्धव ठाकरे खुद चुनाव लड़ें। कांग्रेस का यह भी मानना था कि यदि ठाकरे चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो यह सीट उसे दी जानी चाहिए। अब जबकि उद्धव ठाकरे ने खुद चुनाव न लड़ने का फैसला किया है और दानवे को उम्मीदवार बनाया है, तो सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस इस फैसले पर क्या रुख अपनाती है। दूसरी ओर, अगर सत्ताधारी महायुति गठबंधन अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारता है, तो मुकाबला और कड़ा हो सकता है और वोटों का समीकरण बदल सकता है। फिलहाल, दानवे की उम्मीदवारी ने चुनावी गणित को स्पष्ट तो किया है, लेकिन सियासी रणनीति का असली खेल अभी बाकी है




