
मुंबई। कृषि क्षेत्र में बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सरकार अब विक्रेताओं को राहत देने के विकल्पों पर विचार कर रही है। खासतौर पर सीलबंद पैकिंग में बिक्री करने वाले विक्रेताओं को सैंपल फेल होने की स्थिति में आरोपी न ठहराने के हरियाणा मॉडल का अध्ययन किया जाएगा। मंगलवार को सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनियों से सीलबंद पैकिंग में खरीदे गए बीज, रासायनिक खते और कीटनाशक उसी रूप में किसानों को बेचे जाते हैं, तो ऐसे मामलों में सैंपल फेल होने पर विक्रेताओं को सीधे आरोपी बनाने के बजाय नीति में बदलाव पर विचार किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा राज्य में लागू निर्णय का विस्तृत अध्ययन कर महाराष्ट्र में भी उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, मुदतबाह्य (एक्सपायर्ड) कीटनाशकों की समस्या को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आपूर्तिकर्ता कंपनियों को ऐसे उत्पाद विक्रेताओं से वापस लेने के लिए बाध्य करने के मुद्दे पर ‘माफदा’ और संबंधित कंपनियों के साथ चर्चा की जाएगी। इस दिशा में जल्द ही ठोस निर्णय लिए जाने की संभावना है। इस पहल का उद्देश्य जहां एक ओर विक्रेताओं को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से राहत देना है, वहीं दूसरी ओर कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना भी है।




