
देवेश प्रताप सिंह राठौर/झांसी। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बढ़ती भीषण गर्मी को देखते हुए झांसी के वरिष्ठ जनरल फिजिशियन डॉ. डी.एन. मिश्रा ने आम नागरिकों को सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक तापमान के कारण शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए लोगों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।डॉ. मिश्रा ने सलाह दी कि लोग अत्यधिक गर्मी के समय, विशेषकर दोपहर में बिना आवश्यकता घर से बाहर न निकलें। बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें, हल्के और ढीले कपड़े पहनें तथा चेहरे पर पानी के छींटे मारते रहें। अधिक मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है, ताकि शरीर में तरल पदार्थों की कमी न हो और लू से बचाव किया जा सके।उन्होंने बताया कि शरीर में पानी और नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर शराब का सेवन करने वाले, हृदय रोगी, बुजुर्ग, मोटापे से ग्रस्त, पार्किंसन रोग, अनियंत्रित मधुमेह के मरीज तथा कुछ विशेष दवाइयों (जैसे डाययूरेटिक, एंटीहिस्टामिनिक आदि) का सेवन करने वाले लोगों में हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।डॉ. मिश्रा के अनुसार, हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में शरीर का अत्यधिक गर्म होना, त्वचा का शुष्क होना, पसीना कम आना, तेज नाड़ी, तेज सांस, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मितली, कमजोरी, चक्कर आना और पेशाब कम होना शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शरीर का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस (105°F) या उससे अधिक हो जाए, तो मस्तिष्क और अन्य आंतरिक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।बचाव के उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान पानी साथ रखें और ओआरएस, लस्सी, छाछ, नींबू पानी, चावल का माड़ जैसे घरेलू पेय पदार्थों का सेवन करें, जिससे शरीर में तरल की कमी पूरी हो सके। इसके अलावा घर को ठंडा रखने के लिए पर्दों और दरवाजों का उपयोग करें, शाम के समय घर को खुला रखें, पंखे और गीले कपड़ों का सहारा लें तथा दिन में एक से अधिक बार स्नान करें।उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या हीट स्ट्रोक के लक्षण महसूस हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। सही समय पर सावधानी और उपचार से गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।




