
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित टिप्पणी पर देश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर खड़गे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। बीजेपी प्रतिनिधिमंडल में संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत अन्य नेता शामिल थे। मीडिया से बातचीत में किरण रिजिजू ने खड़गे के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह केवल बीजेपी का नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। उन्होंने कहा, “देश के प्रधानमंत्री को ‘आतंकवादी’ कहना लोकतंत्र और देश का अपमान है। इससे पहले किसी भी राजनीतिक दल ने प्रधानमंत्री के खिलाफ इतनी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया।” रिजिजू ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री केवल किसी पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री होते हैं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र द्वारा चुने गए नेता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले भी प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करती रही है, लेकिन इस बार सभी सीमाएं पार कर दी गई हैं। बीजेपी ने चुनाव आयोग से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। साथ ही, खड़गे से देश से माफी मांगने की भी मांग की गई है। रिजिजू ने बताया कि चुनाव आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “हमारे अनुरोध पर चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच करने का भरोसा दिया है।” यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने एआईएडीएमके और बीजेपी के गठबंधन की आलोचना करते हुए कथित तौर पर मोदी को “ऐसा व्यक्ति जो समानता में विश्वास नहीं करता” बताते हुए विवादित शब्द का इस्तेमाल किया। खड़गे के इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और बीजेपी ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं, कांग्रेस और सहयोगी दल इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता रहे हैं। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल में नई गर्माहट ला दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।




