Tuesday, April 21, 2026
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आत्मबोध से विश्वबोध’ कार्यक्रम को कल्याण में मिला शानदार प्रतिसाद

कल्याण। समाज में वैचारिक जागरूकता और भारतीय चिंतन की समझ को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषयक व्याख्यान को कल्याण में उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आत्मबोध के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर डाॅ. दिनेश प्रताप सिंग ने कहा कि “स्वर्णिम भारत के निर्माण का सपना देखने वालों को विभिन्न वैचारिक और वैश्विक चुनौतियों के प्रति सजग रहना आवश्यक है। उन्होंने रामायण, महाभारत और भगवद्गीता के उदाहरणों के माध्यम से कहा कि भारतीय विचारधारा को समझने और मजबूत करने के लिए आत्मबोध अत्यंत आवश्यक है। “जब व्यक्ति अपने ‘स्व’ को पहचानता है, अपने इतिहास, संस्कृति और वैज्ञानिक तथा सामाजिक पराक्रम को समझता है, तभी वह ‘विश्वबोध’ की दिशा में आगे बढ़ सकता है,” उन्होंने कहा। अपने संबोधन में उन्होंने विभिन्न वैश्विक और वैचारिक प्रवृत्तियों का उल्लेख करते हुए उनसे सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया और समाज से इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत शारदा पूजन से
कार्यक्रम की शुरुआत शारदा पूजन के साथ हुई। प्रास्ताविक प्रवीण देशमुख ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रा. नारायण फडके ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रा. दुर्गेश दुबे ने किया। सरस्वती वंदना सत्यभामासिंह ने प्रस्तुत की, जबकि शांति मंत्र संजय द्विवेदी द्वारा किया गया। परिषद गीत सुमिता भोसले और पल्लवी रानी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में सौ. प्राजक्ता कुलकर्णी ने आभार व्यक्त किया।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे साहित्य प्रेमी
इस अवसर पर डाॅ. शामसुंदर पांडेय, बिपीन वाडेकर, डाॅ. रत्नाकर फाटक, प्रा. दिनानाथ पाटील सहित साहित्य भारती के सदस्य और स्वयंसेवक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के सामूहिक गायन के साथ किया गया।

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