Wednesday, April 15, 2026
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महाराष्ट्र में क्वांटम क्रांति की पहल: 720 करोड़ की सुविधा IIT बॉम्बे में, 2030 तक वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य

मुंबई। मुंबई में क्वांटम तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत देश में इस क्षेत्र को नई गति मिली है, वहीं महाराष्ट्र सरकार ने भी ‘महाराष्ट्र क्वांटम टेक्नोलॉजी मिशन’ की शुरुआत की है। इसी कड़ी में आईआईटी बॉम्बे में ₹720 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक क्वांटम फैब्रिकेशन सुविधा स्थापित की जा रही है, जो देश की पहली फुल-स्टैक क्वांटम हार्डवेयर प्रणाली होगी। इसके अलावा टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसेस और आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से देश का पहला क्वांटम डायमंड माइक्रोचिप इमेजर भी विकसित किया जा रहा है। यह जानकारी सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अशिष शेलार ने बुधवार को वर्ल्ड क्वांटम डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दी। उन्होंने महाराष्ट्र को वर्ष 2030 तक क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने का लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल और सचिव विरेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे। मंत्री शेलार ने कहा कि क्वांटम तकनीक अब केवल कल्पना नहीं, बल्कि कंप्यूटिंग, संचार, स्वास्थ्य, वित्त और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है। उन्होंने ‘बिट्स’ से ‘क्यूबिट्स’ तक के विकास को तकनीकी जगत का बड़ा बदलाव बताया। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक कंप्यूटिंग से अलग है, जिसमें ‘सुपरपोजिशन’ के माध्यम से क्यूबिट एक साथ 0 और 1 दोनों अवस्थाओं में रह सकता है, जिससे जटिल समस्याओं का समाधान बेहद तेजी से संभव होता है। इसके अलावा ‘क्वांटम एंटैंगलमेंट’ सुरक्षित संचार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।उन्होंने कहा कि यह तकनीक औषधि निर्माण, कृषि अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और औद्योगिक प्रक्रियाओं में व्यापक बदलाव ला सकती है। हालांकि, इससे मौजूदा क्रिप्टोग्राफी प्रणालियों के सामने चुनौतियां भी खड़ी होंगी, लेकिन क्वांटम आधारित सुरक्षा समाधान भी विकसित किए जा रहे हैं। सचिव विरेंद्र सिंह ने कहा कि क्वांटम विज्ञान अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से वास्तविक जीवन में उपयोग की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने नीति निर्माण, नवाचार, कौशल विकास और मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र को इस क्षेत्र की आवश्यकता बताया। उन्होंने ‘क्वांटम माइग्रेशन’ पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं को नई तकनीकों के साथ तेजी से अनुकूलित करना होगा। कार्यक्रम के अंत में संजय काटकर ने आभार व्यक्त किया।

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