
बरेली, उत्तर प्रदेश। रामगंगा घाट पर प्रत्येक माह के प्रथम सोमवार को आयोजित होने वाली भव्य महाआरती ने एक बार फिर आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का दिव्य दृश्य प्रस्तुत किया। जिला गंगा समिति और गंगा समग्र के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के उद्यमी, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। महाआरती के दौरान दीपों की रोशनी से पूरा घाट जगमगा उठा और मंत्रोच्चार, घंटों की गूंज तथा भजन-कीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जहां श्रद्धालुओं ने परिवार सहित पहुंचकर पूजा-अर्चना की और मां गंगा नदी के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। आयोजन का दृश्य इतना मनोहारी रहा कि लोगों को वाराणसी और हरिद्वार के घाटों की याद ताजा हो गई।कार्यक्रम की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे इसकी भव्यता और सामाजिक संदेश प्रमुख कारण हैं। गंगा समग्र के महानगर संयोजक ठाकुर अखिलेश सिंह ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गंगा संरक्षण और सामाजिक समरसता का भी माध्यम है, जहां हर वर्ग के लोग एक साथ मां गंगा की आराधना कर समाज में एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में शहर के प्रमुख उद्यमियों और व्यापारियों ने इसे बरेली की गौरवशाली परंपरा बताते हुए निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया और अतिथियों को तुलसी देकर सम्मानित किया।इस अवसर पर अनिल अग्रवाल, अशोक गोयल और डॉ विमल भारद्वाज सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने गंगा सफाई और इस तरह के आयोजनों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। वहीं नागेंद्र कुमार निषाद ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में जीवन, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है, और इसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम का संचालन रोहित राकेश ने किया, जबकि महाआरती की शुरुआत गुड्डू पंडित द्वारा मंत्रोच्चार के साथ की गई।इस भव्य आयोजन में सैकड़ों लोगों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि रामगंगा घाट की महाआरती अब बरेली की एक प्रमुख आध्यात्मिक पहचान बनती जा रही है, जो न केवल श्रद्धा का केंद्र है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश भी दे रही




