
मुंबई। एक युवा भारतीय नाविक की संदिग्ध समुद्री हमले में हुई मौत के बाद उसका परिवार अब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा है। परिवार ने पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने और गरिमा के साथ अंतिम संस्कार करने की मांग की है। मृतक के पिता अमृतलाल सोलंकी (64) और बहन मिताली सोलंकी (33) ने वकील सतीश तालेकर और माधवी अयप्पन के माध्यम से याचिका दायर कर प्रक्रिया में तेजी लाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बार-बार संपर्क के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे (पीठ अध्यक्ष) के समक्ष होने की संभावना है। मृतक दीक्षित सोलंकी (25) एमटी एमकेडी व्योम जहाज़ पर ‘ऑयलर’ के रूप में कार्यरत थे। 4 मार्च को ओमान तट के पास एक विस्फोटक से भरी ड्रोन बोट के हमले में उनकी मौत हो गई। यह हमला पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच हुआ था, और माना जा रहा है कि इस तरह की घटना में जान गंवाने वाले वह पहले भारतीय हो सकते हैं। याचिका में विदेश मंत्रालय, पोर्ट्स शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय, जहाजरानी महानिदेशालय और वी शिप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया गया है। परिवार ने इस घटना से जुड़े जांच और फोरेंसिक रिकॉर्ड तक पहुंच की भी मांग की है।याचिका में तर्क दिया गया है कि “गरिमा का मौलिक अधिकार मृत्यु के बाद भी बना रहता है” और अनुच्छेद 21 के तहत अंतिम संस्कार का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। परिवार का कहना है कि घटना के लगभग एक महीने बाद भी पार्थिव शरीर उन्हें नहीं सौंपा गया है, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। परिवार के अनुसार, शिपिंग कंपनी और संबंधित एजेंसियों से संपर्क करने पर उन्हें केवल अस्पष्ट जवाब मिले। 17 मार्च को दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने जानकारी दी थी कि कुछ कंकाल अवशेष बरामद हुए हैं, जिन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए शारजाह पुलिस को सौंपा गया है। हालांकि, इसके बाद से परिवार को कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। इस पूरे मामले ने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और मृतक नाविकों के अधिकारों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




