स्मित मच्छार: जब फर्ज ही जिंदगी बन जाए
“शौर्य, पराक्रम और अटूट जज्बे पर गर्व “

हेमेन्द्र क्षीरसागर
कुछ लोग इतिहास पढ़ते हैं, लेकिन कैप्टन स्मित मच्छार जैसे शूरवीर इतिहास रचने के लिए पैदा होते हैं। भारतीय विमानन और देश का यह वह चमकता सितारा है, जिसकी सूझबूझ और अदम्य साहस के आगे मौत भी हार मान गई। कैप्टन स्मित का नाम सिर्फ एक कमर्शियल पायलट का नाम नहीं है, बल्कि यह प्रतीक है। अदम्य साहस, अनूठे पराक्रम और मां भारती के प्रति उस अटूट निष्ठा का। जो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है।
अंबर में अदम्य साहस
हाल ही में फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 के दौरान जो आकाश में आपातकालीन स्थिति बनी, उसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया। 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे विमान में जब सह-पायलट के जानलेवा हमले से संकट गहराया। प्लेन तेजी से नीचे गिरने लगा, तब भी कैप्टन स्मित ने हिम्मत नहीं हारी। गंभीर रूप से घायल होने और शरीर से खून बहने के बावजूद उन्होंने खुद से पहले यात्रियों की सुरक्षा को चुना। जानलेवा हमले के बीच उन्होंने कॉकपिट का आपातकालीन दरवाजा खोला। जिससे यात्रियों और क्रू मेंबर्स को अंदर आने और स्थिति को नियंत्रित करने का मौका मिला। अपनी अंतिम सांस तक बहादुरी से लड़ते हुए उन्होंने 174 यात्रियों और क्रू की जान बचाकर एक अभूतपूर्व मिसाल कायम की।
मानव कल्याण ही सबसे बड़ा धर्म
यह केवल एक पायलट द्वारा विमान की लैंडिंग कराने की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानवता और वैश्विक एकजुटता का एक बड़ा उदाहरण है। इस विमान में इज़राइली नागरिक भी शामिल थे। कैप्टन स्मित की इस जांबाजी ने सीमाओं, धर्म और नस्ल से ऊपर उठकर यह संदेश दिया कि एक सच्चे हीरो के लिए मानव कल्याण ही सबसे बड़ा धर्म है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित के इस ‘असाधारण साहस’ की मुक्तकंठ से तारीफ की और उन्हें एक सच्चा हीरो बताया।
जोश, जुनून और जज्बा
जब देश की अस्मिता या निर्दोषों की जान पर बात आती है, तो कैप्टन स्मित जैसे जांबाज ही आगे आकर ढाल बनते हैं। उनका ‘जोश, जुनून और जज्बा’ ऐसा है जो हार शब्द को स्वीकार ही नहीं करता। युद्ध का मैदान हो या आसमान में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा हुई जानलेवा स्थिति। उन्होंने साबित किया कि एक सच्चा नायक किसी भी परिस्थिति में अपने फर्ज से पीछे नहीं हटता। आज जब युवा प्रेरणा के स्रोतों की तलाश में भटकते हैं। कैप्टन स्मित मच्छार का यह साहस उनके लिए एक जलती हुई मशाल की तरह है। उनका यह पराक्रम सिर्फ आज का समाचार नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक धरोहर है। ऐसे वीर सपूतों के दम पर ही पूरी दुनिया में भारत का मस्तक हमेशा ऊंचा रहता है। देश और पूरी दुनिया को कैप्टन स्मित मच्छार के इस शौर्य, पराक्रम, निस्वार्थ सेवा और अटूट जज्बे पर गर्व है।
