Wednesday, March 11, 2026
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जेएनपीए का बड़ा फैसला: फलों-सब्जियों के निर्यात कंटेनरों पर शुल्क माफी

मुंबई। राज्य के फल और सब्जी उत्पादक किसानों तथा निर्यातकों के हित को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) ने बंदरगाह पर फंसे निर्यात कंटेनरों के लिए महत्वपूर्ण राहत देने का निर्णय लिया है। इसके तहत फलों और सब्जियों के निर्यात कंटेनरों पर लगने वाले स्टोरेज और डिटेंशन शुल्क को पूरी तरह माफ किया गया है, जबकि कोल्ड स्टोरेज कंटेनरों की बिजली कनेक्शन फीस में 80 प्रतिशत की छूट दी गई है। यह जानकारी मंगलवार को राज्य के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने दी। मध्यपूर्व क्षेत्र में युद्ध जैसी परिस्थितियों से उत्पन्न भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत से खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों को होने वाले फल और सब्जी निर्यात के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया था। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने केंद्र सरकार से तत्काल राहत उपाय करने की मांग की थी। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर जेएनपीटी और मुंद्रा पोर्ट पर फंसे कंटेनरों के लिए शुल्क माफी और जहाज उपलब्ध होने तक भंडारण सुविधा देने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार द्वारा सकारात्मक पहल करते हुए जेएनपीए ने कंटेनरों पर लगने वाले स्टोरेज और डिटेंशन शुल्क को पूरी तरह माफ करने के साथ कोल्ड स्टोरेज कंटेनरों के बिजली कनेक्शन शुल्क में 80 प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया है। यह राहत 28 फरवरी 2026 की रात 12 बजे से 14 मार्च 2026 की मध्यरात्रि तक कुल 15 दिनों के लिए लागू रहेगी। यह सुविधा 28 फरवरी को टर्मिनल में मौजूद तथा 8 मार्च सुबह 7 बजे तक प्रवेश दर्ज कर चुके कंटेनरों पर लागू होगी। इसके अलावा जेएनपीए और टर्मिनल ऑपरेटरों ने कई अन्य व्यवस्थाएं भी की हैं। जहाज उपलब्ध होने तक फंसे कंटेनरों को कंटेनर स्टोरेज यार्ड में रखने की सुविधा दी गई है। साथ ही सीमा शुल्क विभाग के समन्वय से अन्य बंदरगाहों से मध्यपूर्व जाने वाले कंटेनरों को अस्थायी पुनर्लोड कार्गो के रूप में जेएनपीए में रखने की अनुमति भी दी गई है। बढ़ते माल भंडारण को देखते हुए टर्मिनलों को अतिरिक्त जगह भी उपलब्ध कराई गई है। मंत्री रावल ने बताया कि निर्यात में देरी के कारण निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। टर्मिनल बिजली कनेक्शन शुल्क, डिटेंशन चार्ज और विलंब दंड के कारण हर सात दिन की देरी पर प्रति कंटेनर लगभग दो लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा था। वर्तमान में लगभग 250 कंटेनर जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर फंसे हुए हैं, जबकि करीब 150 कंटेनर Mundra Port पर रुके हुए हैं। सरकार के इस निर्णय से किसानों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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