महाराष्ट्र में सूखे से निपटने के लिए जिला योजना निधि का अधिकतम इस्तेमाल करें: मंत्री बावनकुले

पेयजल और पशुओं के चारा-पानी को प्राथमिकता; 100% फसल पंचनामे के निर्देश, अधिकारियों की उपस्थिति पर डिजिटल निगरानी की तैयारी

मुंबई। महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए जिला वार्षिक योजना समिति की निधि का अधिकतम उपयोग सूखा राहत उपायों पर करने के निर्देश राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए हैं। उन्होंने पेयजल, पशुधन के लिए चारा-पानी, फसलों के पंचनामे और कृषि के लिए पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय प्रशासन को समन्वय के साथ युद्धस्तर पर काम करने को कहा है। राज्य की जिला वार्षिक योजना व्यवस्था में कमी अथवा आपात स्थिति से निपटने के लिए निधि के इस्तेमाल का प्रावधान भी है। मंगलवार को अपर्याप्त बारिश के कारण उत्पन्न सूखे जैसी स्थिति से निपटने के उपायों के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक बावनकुले की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जिलेवार स्थिति की समीक्षा करने के साथ विभिन्न विभागों की जरूरतों और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की गई। बैठक में ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे, पर्यावरण एवं पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे, जलसंसाधन मंत्री गिरीश महाजन, जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव-पाटील, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक, सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील, सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट, राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार वर्षा, भूजल स्तर, फसलों की स्थिति और उपलब्ध अन्य आंकड़ों का गहन अध्ययन कर सूखे की स्थिति का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाए। सूखे जैसी स्थिति वाले तालुकों की लगातार समीक्षा कर तथ्यात्मक रिपोर्ट सरकार को भेजने को कहा गया है।
100% फसलों का पंचनामा, ड्रोन से भी जुटाई जाएगी जानकारी
सूखा प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को आधार बनाकर 100 प्रतिशत फसल पंचनामे करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्यक्ष निरीक्षण, तस्वीरों और ड्रोन से मिलने वाली जानकारी के आधार पर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पंचनामे की प्रक्रिया पारदर्शी रखने के साथ संबंधित किसानों के हस्ताक्षर लेने को भी कहा गया है। बावनकुळे ने कहा कि सूखे के दौरान जिला और तालुका स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। तलाठी, ग्रामसेवक, कृषि सहायक और तालुका स्तर के अधिकारियों को अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहने तथा नागरिकों की समस्याओं और सूखे से जुड़ी जानकारी समय पर प्रशासन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। हाल में बावनकुळे ने सूखे की पृष्ठभूमि में अधिकारियों-कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर सार्वजनिक रूप से भी जोर दिया था। अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति की प्रभावी निगरानी के लिए फेस आधारित अटेंडेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी तकनीक के इस्तेमाल पर भी बैठक में चर्चा हुई।
सबसे पहले पीने का पानी, फिर कृषि के लिए आवंटन
जल नियोजन में सबसे पहले लोगों के पीने के पानी और पशुओं के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। गांव के तालाब, पाझर तालाब, लघु सिंचाई परियोजनाओं और पेयजल स्रोतों को आवश्यकता के अनुसार भरकर रखने पर जोर दिया गया। पेयजल की जरूरतों का नियोजन पूरा होने के बाद कृषि के लिए पानी के वितरण की जिलेवार समीक्षा की जाएगी। उपलब्ध पानी का कुछ हिस्सा आपात स्थिति के लिए सुरक्षित रखने पर भी चर्चा हुई। सिंचाई का पानी उपलब्ध कराते समय चारा फसलों और मोटे अनाज को प्राथमिकता तथा उसके बाद रबी फसलों पर विचार करने को कहा गया है। जहां पानी सीमित है, वहां किसानों को रबी मौसम के संबंध में पहले से कृषि सलाह देने के निर्देश हैं।
जल आरक्षण और वितरण के लिए स्पष्ट नीति
बैठक में पानी के आरक्षण और वितरण के लिए स्पष्ट मानदंड वाला शासन निर्णय जारी करने का सुझाव दिया गया। इसके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी पालकमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के माध्यम से करने पर भी चर्चा हुई। सूखा और जलसंकट वाले क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल करने वाली निर्माण परियोजनाओं की जिलेवार समीक्षा करने को भी कहा गया है। जिन इलाकों में पेयजल की समस्या गंभीर है, वहां स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। बावनकुळे ने सभी विभागों से कहा कि सूखे जैसी स्थिति में किसानों, ग्रामीण नागरिकों, पशुधन और पेयजल की जरूरतों को केंद्र में रखकर आपसी समन्वय के साथ तत्काल और युद्धस्तर पर कार्रवाई की जाए।

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