पश्चिम एशिया के हालात पर जयशंकर की जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों से चर्चा

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को संकटग्रस्त पश्चिम एशिया के दो अहम देशों जॉर्डन और मिस्र के विदेश मंत्रियों से मुलाकात कर क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा की। जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा- पश्चिम एशिया-मध्य पूर्व पर हमारी चर्चा वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण रही। खाड़ी क्षेत्र के किनारे स्थित जॉर्डन इस क्षेत्र के घटनाक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देल अत्ती के साथ हुई बैठक को जयशंकर ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों की एक उपयोगी समीक्षा बताया। भारत और मिस्र के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं और पश्चिम एशिया में मिस्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी बीच पश्चिम एशिया से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने दो-राज्य समाधान को लागू करने के लिए ग्लोबल अलायंस की उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत ने दो-राज्य समाधान के लिए अपने स्पष्ट और निरंतर समर्थन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “भारत का दृष्टिकोण राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ व्यावहारिक समर्थन को जोड़ता है।” सऊदी अरब की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में फिलिस्तीन और इजरायल के स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्रों के रूप में शांति के साथ एक-दूसरे के बगल में मौजूद रहने वाले दो-राज्य समाधान पर जोर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा भी दो-राज्य समाधान के विचार का लगातार समर्थन करती रही है। इस बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन से भी मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने ब्राउन को आश्वस्त किया है कि भारत इस वर्ष नवंबर में एंटीगुआ और बारबुडा में होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) की सफलता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ रहा है। भारत ने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से एंटीगुआ को 10 लाख डॉलर की सहायता दी है। इसके अलावा तूफान से क्षतिग्रस्त अस्पताल के पुनर्निर्माण जैसे कार्यक्रमों के लिए भी भारत ने प्रत्यक्ष सहायता प्रदान की है।
