लखनऊ में सजा महाराष्ट्र की लोककलाओं का रंग, ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ ने मोहा मन
गणेश वंदना से मंगलागौर और गोंधल तक दिखी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक झलक, लोककला के जरिए महाराष्ट्र-उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक रिश्तों को मिली नई मजबूती

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। महाराष्ट्र की समृद्ध लोककला, लोकपरंपरा और श्रीगणेश भक्ति के विविध रंग उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देखने को मिले। महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग और सांस्कृतिक कार्य संचालनालय, मुंबई के सहयोग से राय उमनाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ में कलाकारों ने महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति को मंच पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में गणेश वंदना, नमन, ओवी, मंगलागौर, गोंधल, बाल्या नृत्य, गौरी-गणपति पर आधारित हिंदी रचनाएं एवं भजन, संगीतमय नृत्य नाटिका और वाद्यवृंद के साथ श्रीगणेश पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पारंपरिक वेशभूषा, संगीत, अभिनय और नृत्य के जरिए कलाकारों ने महाराष्ट्र की अलग-अलग लोकपरंपराओं की झलक पेश की, जिसे लखनऊ के दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य पवन सिंह चौहान, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, निखिलेश लखनवी, बिरजू महाराज कथक संस्थान से जुड़ी कुमकुम घर एवं निखिलेश तिवारी, उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक विभाग के पूर्व कार्यक्रम कार्यकारी अधिकारी कमलेश पाठक तथा संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष अच्चेलाल सोनी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आयोजन की सराहना करते हुए उपस्थित अतिथियों ने महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार और सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के अधिकारियों को बधाई दी। महाराष्ट्र की लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को राज्य की सीमाओं से बाहर देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की पहल की भी प्रशंसा की गई। इस वर्ष गणेशोत्सव को महाराष्ट्र में ‘राज्य महोत्सव’ घोषित किए जाने के बाद राज्य की लोककला और लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ के माध्यम से महाराष्ट्र की अलग-अलग लोककलाओं और गणेश भक्ति से जुड़ी परंपराओं को देश के विभिन्न राज्यों में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों के कलाकारों और कला प्रेमियों के बीच सांस्कृतिक संवाद और आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है। इसके साथ ही पारंपरिक लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का समन्वय श्रीकृष्ण कला फाउंडेशन ने किया। फाउंडेशन के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए महाराष्ट्र की लोककला की समृद्ध परंपरा को लखनऊ के मंच पर प्रस्तुत किया। आयोजन को सफल बनाने में लखनऊ के कमलेश पाठक, दुर्गेश पाठक और आशुतोष पाठक का भी सहयोग रहा। आयोजकों के अनुसार, लखनऊ के दर्शकों से मिले उत्साह और आत्मीय स्वागत ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक संवाद को और मजबूती दी है। ‘लोककलेतील श्रीगणेश’ के माध्यम से श्रीगणेश भक्ति के साथ महाराष्ट्र की लोककला और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
