झांसी के प्रमुख चौराहों पर लगेंगे एयर स्प्रिंकलर: डीएम गौरांग राठी
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए डीएम गौरांग राठी सख्त, नगर निगम खरीदेगा मोबाइल एयर स्प्रिंकलर, 50 में से 25 स्टोन क्रशरों पर लग चुकी हैं स्मॉग गन

झांसी, उत्तर प्रदेश। शहर के व्यस्त चौराहों पर खड़े लोगों को धूल और वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए अब एयर स्प्रिंकलर लगाए जाएंगे। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने नगर निगम को प्रमुख चौराहों को चिह्नित कर वहां एयर स्प्रिंकलर की व्यवस्था करने के साथ मोबाइल एयर स्प्रिंकलर खरीदने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जिले में संचालित सभी स्टोन क्रशरों पर स्मॉग गन लगाने को कहा गया है, ताकि धूल के महीन कणों को हवा में फैलने से रोका जा सके। जिलाधिकारी गौरांग राठी की अध्यक्षता में सोमवार को जूम के माध्यम से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत सिटी लेवल इम्प्लीमेंटेशन कमेटी की बैठक हुई। बैठक में डीएम ने जिले और शहर की मौजूदा वायु गुणवत्ता की स्थिति की जानकारी लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को शहर की वायु गुणवत्ता की लगातार मॉनिटरिंग करने और जहां प्रदूषण का स्तर अधिक मिले, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। डीएम ने विशेष रूप से पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर को कम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम 10 यानी हवा में मौजूद धूल के कणों को कम करने के लिए सड़कों की स्थिति सुधारना जरूरी है। शहर की सड़कों का पक्कीकरण, फुटपाथों का निर्माण और खुले स्थानों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं। मुख्य और व्यस्त चौराहों पर एयर स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी का महीन छिड़काव कर धूल को नियंत्रित किया जाए। जिलाधिकारी ने नगर निगम को ऐसे व्यस्त चौराहों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां बड़ी संख्या में वाहन और आम लोग रुकते हैं। इन स्थानों पर प्रदूषण का प्रभाव कम करने के लिए एयर स्प्रिंकलर लगाने के साथ नगर निगम को मोबाइल एयर स्प्रिंकलर खरीदने को भी कहा गया, ताकि जरूरत के अनुसार शहर के अलग-अलग हिस्सों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। निर्माण कार्यों से फैलने वाली धूल को लेकर भी डीएम ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भवनों को तोड़ने से निकलने वाले मलबे यानी डेमोलिशन वेस्ट के लिए उचित निस्तारण व्यवस्था तैयार की जाए। सभी स्थानीय निकाय इसके लिए निर्धारित स्थान चिह्नित करें और इसकी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं, ताकि भवन ध्वस्त होने के बाद मलबा सड़कों अथवा खुले स्थानों पर न फेंका जाए। उन्होंने निर्माण स्थलों पर वायु प्रदूषण रोकने के नियमों का कड़ाई से पालन कराने तथा सड़कों पर पड़े कंस्ट्रक्शन मटीरियल को हटाने के लिए भी सख्त कदम उठाने को कहा। निर्माण सामग्री को खुले में छोड़ने और उससे धूल फैलने की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पीएम 2.5 के स्तर को कम करने के लिए जिलाधिकारी ने वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मैनपावर भी बढ़ाई जाए। शहर की सड़कों को जाममुक्त बनाने के लिए यातायात व्यवस्था में सुधार करने पर भी जोर दिया गया। डीएम ने अधिकारियों से पिछले वर्षों की तुलना में पीएम 2.5 के स्तर में आए सुधार के कारणों का विश्लेषण करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन उपायों के कारण वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है, उन्हें चिह्नित कर शहर के दूसरे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जाए।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई। क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इमरान अली ने बताया कि इलाइट चौराहा और वीरांगना नगर सहित कार्यालय परिसर में वायु प्रदूषण मापक यंत्र स्थापित हैं और इनके माध्यम से वायु गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 50 स्टोन क्रशर संचालित हैं। इनमें से 25 स्टोन क्रशरों पर स्मॉग गन लगाई जा चुकी हैं, जबकि शेष स्टोन क्रशरों पर भी जल्द स्मॉग गन लगाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी गौरांग राठी ने स्पष्ट किया कि शहर में स्वच्छ हवा और बेहतर वातावरण के लिए केवल निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ सड़कों की धूल, निर्माण मलबे, वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
