ड्रग तस्करी से ₹3.96 करोड़ की काली कमाई, दुबई भेजकर USDT में बदलता था नेटवर्क; ED ने 5 और आरोपियों पर कसा शिकंजा

गोवा ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट, अंतरराज्यीय और सीमा पार तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज

बैंकिंग चैनलों से दुबई भेजी गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर डार्क वेब से खरीदे जाते थे नशीले पदार्थ; संपत्तियां भी अटैच

पणजी, गोवा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पणजी जोनल कार्यालय ने अंतरराज्यीय और सीमा पार ड्रग तस्करी से अर्जित करीब ₹3.96 करोड़ की अपराध की आय (Proceeds of Crime) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पांच और आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। ED ने 18 सितंबर 2026 को उत्तर गोवा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की विशेष PMLA अदालत के समक्ष पांच अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। ED के मुताबिक सप्लीमेंट्री शिकायत में निहाल वडक्कनचेरी नाजेर, प्रभोश पी.के., अल्फिन थॉमस, धीरज मैथ्यूज और निशांत प्रताप को आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 44 सहपठित धारा 45 के तहत शिकायत दाखिल की गई है। यह कार्रवाई 16 मार्च 2026 को दाखिल मुख्य अभियोजन शिकायत की अगली कड़ी है। ED ने बताया कि मुख्य अभियोजन शिकायत में पहले सात आरोपियों को आरोपी बनाया गया था। जांच में संगठित अंतरराज्यीय और सीमा पार नारकोटिक ड्रग्स तथा साइकोट्रॉपिक पदार्थों की तस्करी के जरिए करीब ₹3.96 करोड़ की अपराध की आय उत्पन्न होने की बात सामने आई। आगे की जांच में पांच और व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका अपराध की आय को उत्पन्न करने, जुटाने, लेयरिंग, छिपाने और उसे दूसरे रूप में बदलने से जुड़ी पाई गई।
दुबई भेजी ड्रग मनी, फिर USDT में कन्वर्ट
ED की जांच में सामने आया कि मामले का आधार उत्तर गोवा के एंटी-नारकोटिक सेल पुलिस स्टेशन में 15 अक्टूबर 2024 को दर्ज FIR नंबर 22/2024 है। यह मामला NDPS Act की धाराओं के तहत मधुपन सुरेश ससिकला के खिलाफ दर्ज किया गया था। ED के अनुसार मधुपन एस.एस. ने वर्ष 2016 से संगठित अंतरराज्यीय और सीमा पार ड्रग तस्करी के जरिए करीब ₹3.96 करोड़ की अपराध की आय अर्जित की। इस रकम के एक हिस्से को बैंकिंग चैनलों के जरिए दुबई भेजा गया और वहां क्रिप्टोकरेंसी USDT में परिवर्तित किया गया। बाद में इसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल डार्क वेब के जरिए नशीले पदार्थ खरीदने के लिए किया गया।
करीब ₹26.87 लाख की संपत्तियां अटैच
जांच के दौरान ED ने आरोपी अनम चरण प्रधान के पास मौजूद अपराध की आय ₹9,39,250 और उत्तम चंद के पास ₹17.48 लाख निर्धारित की। इसके बाद इनके बराबर मूल्य की अचल संपत्तियों को 16 सितंबर 2026 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर नंबर 13/2026 के जरिए अस्थायी रूप से अटैच किया गया। दोनों रकम को मिलाकर करीब ₹26.87 लाख मूल्य की संपत्तियां अटैच की गई हैं। ED ने कहा है कि ड्रग तस्करी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे पर प्रहार कर उसे ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई जारी है। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई नशा मुक्त भारत अभियान के व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है। अवैध ड्रग व्यापार और मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। ED ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।

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