बदलापुर में रोजाना 600 टन कचरे का होगा वैज्ञानिक निपटारा, MMRDA की परियोजना का 60% काम पूरा
अंबरनाथ, कुलगांव-बदलापुर और उल्हासनगर को मिलेगा लाभ; कचरे से बनेगी खाद और RDF, प्लास्टिक-कागज सहित उपयोगी सामग्री होगी रिसाइकिल

मुंबई। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) की बदलापुर में विकसित की जा रही 600 टन प्रतिदिन क्षमता वाली एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण परियोजना का 60 प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो गया है। KfW-मुंबई महानगर प्रदेश शहरी बुनियादी ढांचा सुधार कार्यक्रम (MMRUIIP) के तहत समर्थित इस परियोजना से अंबरनाथ, कुलगांव-बदलापुर और उल्हासनगर के लिए आधुनिक एवं वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाएगी। डिजाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBOT) मॉडल पर विकसित की जा रही परियोजना में प्रतिदिन 600 टन नगर ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा सकेगा। इसमें पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की छंटाई और पुनर्प्राप्ति के लिए मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF), जैव-अपघटनीय कचरे के प्रसंस्करण की सुविधा और शेष अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के लिए वैज्ञानिक सैनिटरी लैंडफिल की व्यवस्था होगी। परियोजना के तहत कचरे से कागज, प्लास्टिक, धातु और कांच जैसी उपयोगी सामग्री अलग कर पुनर्चक्रण के लिए भेजी जाएगी। जैव-अपघटनीय कचरे से कंपोस्ट तैयार किया जाएगा, जबकि उपयुक्त शेष कचरे से रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) बनाया जाएगा। इससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। MMRDA के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से कचरे के प्रसंस्करण से खुले में कचरा डालने और लैंडफिल पर निर्भरता कम होगी। इससे दुर्गंध, रोग फैलाने वाले कीटों के प्रजनन और कचरे में आग लगने जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। जैविक कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण से मीथेन उत्सर्जन घटाने तथा लीचेट के उपचार से मिट्टी और भूजल को प्रदूषण से बचाने में भी सहायता मिलेगी। परियोजना से निर्माण और संचालन के दौरान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की भी संभावना है। साथ ही अनौपचारिक कचरा बीनने वालों को औपचारिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली से जोड़कर अधिक सुरक्षित और संगठित आजीविका उपलब्ध कराने तथा स्थानीय पुनर्चक्रण उद्योग को बढ़ावा देने की योजना है। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए MMRDA संबंधित स्थानीय निकायों, KfW Development Bank, परियोजना प्रबंधन सलाहकार, ठेकेदारों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और वैधानिक प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर रहा है। कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए माइलस्टोन आधारित भुगतान, स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन और परियोजना प्रबंधन सलाहकार की निगरानी की व्यवस्था की गई है। MMRDA का कहना है कि 60 प्रतिशत भौतिक प्रगति का पड़ाव पूरा होने के बाद परियोजना तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रही है। इसके चालू होने पर अंबरनाथ, कुलगांव-बदलापुर और उल्हासनगर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की क्षमता बढ़ेगी और तीनों शहरों में स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरी व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।
