
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोलाबा स्थित प्रतिष्ठित रक्षा-संचालित यूनाइटेड सर्विसेज क्लब (यूएस क्लब) के 77.52 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में मुख्य आरोपी और क्लब के पूर्व उप वित्त सचिव बर्नडेट वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की एकल पीठ ने कहा कि वर्मा को गिरफ्तारी से संरक्षण देने का कोई आधार नहीं बनता। वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने 19 वर्षों तक क्लब की वित्तीय व्यवस्था में रहकर गबन किया। क्लब का प्रबंधन भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। यह मामला तब सामने आया जब इस साल जनवरी में एक गुमनाम पत्र के माध्यम से वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इसके आधार पर 25 फरवरी, 2025 को कफ परेड पुलिस स्टेशन में क्लब के सचिव कैप्टन विष्णुसौरभ शर्मा की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में वर्मा ने मुंबई में 14 फ्लैट, 7 दुकानें, और रेंज रोवर, मर्सिडीज व एमजी हेक्टर जैसी लग्जरी कारों का मालिक होने की बात स्वीकार की, जो कथित तौर पर गबन किए गए पैसों से खरीदे गए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में ये गाड़ियाँ बेच दी गईं और उनकी आय से 8 करोड़ रुपये से अधिक की रकम सावधि जमा और निवेश के रूप में लगाए गए। उन्होंने विजय ग्रुप में 6.45 करोड़ रुपये और राजेश इन्वेस्टमेंट में 50 लाख रुपये के निवेश को भी स्वीकार किया। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि वर्मा ने 27 जनवरी, 2025 को क्लब सचिव को एक व्हाट्सएप संदेश भेजा था, जिसमें उन्होंने धन के दुरुपयोग की बात स्वीकार की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्मा ने न तो जांच में सहयोग किया और न ही आय के वास्तविक स्रोत का स्पष्ट खुलासा किया। इससे पहले इसी मामले में सह-आरोपी कैप्टन वी. सौरभ दत्ता की अग्रिम जमानत याचिका भी 25 अप्रैल को खारिज की गई थी। अदालत ने यह कहते हुए वर्मा की याचिका खारिज की कि सह-आरोपियों ने उन्हें पूरे गबन षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताया है। वर्मा की चार सप्ताह तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को भी अदालत ने अस्वीकार कर दिया। अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया, जिसे मानते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया अनुरोध खारिज किया जाता है।




