भ्रष्टाचार में लिप्त बीएमसी आर/मध्य विभाग के सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की कब होगी जांच?

रघुलीला मॉल में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं करने वाले सहायक आयुक्त को करो निलंबित

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की पहली महिला आयुक्त अश्विनी भिड़े के नेतृत्व में प्रशासन के पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत होने की उम्मीद थी। लेकिन वार्डों में बैठे सहायक आयुक्तों की कार्यप्रणाली से उनकी छवि धूमिल हो रही है। बीएमसी के आर/मध्य विभाग की बात करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि बीएमसी आर/मध्य विभाग के सहायक आयुक्त एवं प्रभारी पदनिर्देशित अधिकारी (डीओ) प्रफुल तांबे पर वार्ड में बैठकर भ्रष्टाचार कर रहे है। शिकायतों के बाद भी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। साथ ही बीएमसी निधि से होने वाले विकास कार्यों में भी कमीशनखोरी भी जमकर हो रही हैं। करोड़ों रुपये के फंड से होने वाले चार-पांच काम अच्छे तरीके से कराकर बाकी कार्यों में कमीशनखोरी की जा रही है। जितनी राशि का टेंडर होता है, काम उसका आधा भी नहीं होने के आरोप हैं, जो जांच का विषय है। जानकारी के अनुसार, कांदिवली पश्चिम स्थित रघुलीला मेगा मॉल में प्रथम एवं द्वितीय तल पर बनी लगभग सभी दुकानों में अवैध पोटमहाल (मेजानाइन फ्लोर) बनाए गए हैं। इन निर्माणों को लेकर पिछले एक वर्ष से लगातार शिकायतें की जा रही हैं और ‘दैनिक स्वर्णिम प्रदेश’ ने 23 जून 2026 के अंक में “बीएमसी आर/मध्य विभाग के बेलगाम सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की कार्यप्रणाली की कब होगी जांच?” शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। साथ ही विभागीय अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों और बीएमसी प्रशासन के वरिष्ठ स्तर तक मामला पहुंचाया गया, लेकिन हर बार केवल कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं सामाजिक संगठन हक की हुंकार के अध्यक्ष दिनेश वर्मा ने कहा कि सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की कार्यप्रणाली संदिग्ध प्रतीत होती है। उनका कहना है कि मॉल जैसी जगह पर अतिरिक्त निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद आर/मध्य विभाग के अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इससे विभाग की निष्पक्षता, जवाबदेही और अवैध निर्माणों के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े और बीएमसी विजिलेंस विभाग के सह आयुक्त एम.देवेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की कार्यप्रणाली तथा रघुलीला मेगा मॉल में हुए अवैध निर्माणों की निष्पक्ष जांच कराएंगे?

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