
मुंबई। विले पार्ले पुलिस ने गुरुवार को वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को अवरुद्ध करने और सुबह के पीक आवर्स में यातायात बाधित करने के आरोप में 46 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें अधिकांश ट्रक ड्राइवर शामिल हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 22 भारी वाहनों को भी जब्त कर लिया। पुलिस के अनुसार इस आंदोलन के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने बताया कि हाईवे जाम होने के कारण बड़ी संख्या में ऑफिस जाने वाले लोग, कक्षा 10 और 12 के परीक्षा देने जा रहे छात्र तथा कई एम्बुलेंस ट्रैफिक में फंस गए। यह जाम मलाड और कुरार तक फैल गया, जिससे लंबे समय तक यातायात प्रभावित रहा। जानकारी के अनुसार ड्राइवरों का यह समूह राज्यभर में प्रस्तावित हड़ताल से पहले ई-चालान सिस्टम के विरोध में इकट्ठा हुआ था, हालांकि बाद में हड़ताल को टाल दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में एक ट्रांसपोर्ट संगठन के पांच पदाधिकारी भी शामिल हैं, जबकि अन्य ड्राइवर और क्लीनर बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन लोगों ने अंधेरी ब्रिज की साउथबाउंड लेन पर अपनी भारी गाड़ियां खड़ी कर दी थीं। पुलिस के मुताबिक, फिनलैंड के राष्ट्रपति के मुंबई दौरे के कारण ट्रैफिक व्यवस्था में तैनात अधिकारियों ने साउथबाउंड लेन में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास खड़ी भारी गाड़ियों को देखा, जिससे दक्षिण मुंबई की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था। मौके पर पहुंचने पर करीब 20 से 25 ड्राइवर जमा मिले। जब पुलिस ने उन्हें वाहन हटाने के लिए कहा तो उन्होंने कथित तौर पर मना कर दिया। इस दौरान हाईवे पर लंबा जाम लग गया और वाहनों की कतारें कई किलोमीटर तक फैल गईं। स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गबाजी चिमाटे भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ड्राइवरों से पूछा कि क्या उन्होंने विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस या किसी स्थानीय प्राधिकरण से अनुमति ली है, लेकिन ड्राइवरों ने अनुमति लेने से इनकार कर दिया। पुलिस के अनुसार जब अधिकारियों ने वाहनों को हटाने का प्रयास किया तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की।




