IIT बॉम्बे में 22 वर्षीय छात्र की मौत, ChatGPT से नकल के आरोप के बाद कैंपस में फूटा गुस्सा
साहिल वाकोड़े की मौत सात महीने में तीसरी ऐसी घटना, छात्रों का प्रदर्शन, संस्थान का दावा- नहीं शुरू की थी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई

मुंबई। देश के प्रतिष्ठित आईआईटी बॉम्बे में शुक्रवार को 22 वर्षीय छात्र साहिल रविंद्र वाकोड़े की मौत ने पूरे कैंपस को झकझोर दिया। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला साहिल ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे वर्ष का बीटेक छात्र था। उसकी मौत के बाद जहां साथी छात्रों में शोक और आक्रोश है, वहीं इस घटना ने एक बार फिर देश के बड़े शिक्षण संस्थानों में छात्रों पर दबाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और संस्थान की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को परीक्षा के दौरान साहिल मोबाइल फोन इस्तेमाल करते पाया गया था। आईआईटी बॉम्बे का कहना है कि उसने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने का प्रयास किया था। इसके बाद संबंधित शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने साहिल से बातचीत की। संस्थान का दावा है कि उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और बातचीत के दौरान उसे भरोसा दिलाया गया था कि यह घटना उसके अकादमिक करियर को प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं करेगी। इसके बाद साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया। शाम को जब कमरे से कोई जवाब नहीं मिला तो साथी छात्रों ने अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद साहिल अपने कमरे में मृत मिला। पवई पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में उसकी मौत के पीछे की परिस्थितियों और परीक्षा की घटना के बीच सीधे संबंध को जांच पूरी होने से पहले स्थापित नहीं किया जा सकता।
मौत के बाद छात्रों का प्रदर्शन
साहिल की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में छात्र परिसर में जमा हो गए और प्रशासन से जवाबदेही तथा घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि साहिल को संभावित निलंबन का डर था। हालांकि आईआईटी बॉम्बे ने इससे अलग रुख रखते हुए कहा है कि उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। छात्रों के विरोध के बीच परीक्षाओं को भी स्थगित किया गया। साहिल की मौत इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पिछले सात महीनों में आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्र की आत्महत्या की यह तीसरी रिपोर्टेड घटना है। इससे पहले फरवरी और जुलाई में भी दो विद्यार्थियों की मौत हुई थी।
एक मौत, लेकिन सवाल कई
साहिल की मौत के वास्तविक कारणों का जवाब पुलिस जांच से ही सामने आएगा। उसके मन में उस समय क्या चल रहा था, इसे लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन इस घटना के बाद छात्रों की ओर से उठाए गए सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचने के पीछे विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत होती है। उनके साथ परिवार की उम्मीदें, करियर की चिंता, पढ़ाई का दबाव और प्रतिस्पर्धा भी जुड़ी रहती है। ऐसे में किसी छात्र से गलती होने पर अकादमिक प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन उसके बाद वह मानसिक रूप से किस स्थिति में है और उसे तत्काल सहायता की जरूरत तो नहीं—इस पर भी संस्थानों को संवेदनशील व्यवस्था विकसित करनी होगी। ChatGPT और दूसरे AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल ने शिक्षण संस्थानों के सामने नई चुनौती खड़ी की है। परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल निश्चित रूप से अकादमिक अनुशासन का विषय है, लेकिन ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए नियमों के साथ संवाद और छात्र सहायता की मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है। काउंसलिंग सेंटर होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़ा सवाल यह भी है कि संकट में फंसा विद्यार्थी क्या बिना डर, शर्म या भविष्य खराब होने की आशंका के वहां तक पहुंच पा रहा है? क्या शिक्षक और प्रशासन ऐसे संकेत पहचानने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार हैं? और किसी गंभीर अकादमिक घटना के बाद छात्र को अकेला छोड़ने से पहले उसकी स्थिति का आकलन करने की कोई प्रभावी व्यवस्था है? साहिल के परिवार ने जिस बेटे को बड़ी उम्मीदों के साथ देश के प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने भेजा था, उसकी मौत उनके लिए अपूरणीय क्षति है। इस दुख के बीच जांच से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि घटना से पहले क्या हुआ और क्या ऐसी किसी त्रासदी को रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर कुछ और किया जा सकता था। साहिल अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन उसकी मौत के बाद उठे सवाल जरूर बाकी हैं—आखिर कितनी छात्र मौतों के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और संकट के समय तत्काल सहायता की व्यवस्था को अकादमिक प्रदर्शन जितनी प्राथमिकता मिलेगी?
