पीएम ई-विद्या चैनलों के लिए शैक्षिक वीडियो बनाएंगे उन्नाव के शिक्षक डॉ. प्रदीप वर्मा
एससीईआरटी लखनऊ में चार दिवसीय कार्यशाला शुरू, प्रदेश के 25 चयनित प्रतिभागी ले रहे हिस्सा

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। प्रधानमंत्री ई-विद्या डीटीएच चैनलों पर प्रसारण के लिए शैक्षिक वीडियो तैयार करने के उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), लखनऊ में सोमवार से चार दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। 12 से 15 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यशाला के द्वितीय चरण में प्रदेश के 25 चयनित प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला के पहले दिन कुछ शिक्षकों के शैक्षिक वीडियो प्रोजेक्ट की शूटिंग भी की गई। इस कार्यशाला में उन्नाव के शिक्षक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा को कक्षा छह के गणित विषय के ‘सममितता’ पाठ पर आधारित शैक्षिक वीडियो की स्क्रिप्ट तैयार करने और शूटिंग से संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, वीडियो स्क्रिप्ट की समीक्षा का दायित्व जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्रवक्ता दिनेश कुमार को दिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के दिशा-निर्देशों और एससीईआरटी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में वीडियो निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, शैक्षिक प्रस्तुतीकरण और तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागी निर्धारित पाठ्यवस्तु के आधार पर विद्यार्थियों के लिए सरल और रोचक शैक्षिक सामग्री तैयार कर रहे हैं। कार्यशाला में तकनीकी कार्यों के संपादन की जिम्मेदारी कमल किशोर और आशीष दीक्षित सहित अन्य सदस्यों को सौंपी गई है। वहीं, स्क्रिप्ट लेखन से संबंधित मार्गदर्शन आशुतोष श्रीवास्तव एवं वरिष्ठ प्रवक्ताओं द्वारा दिया जा रहा है। एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन कुमार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, कार्यशाला 12 से 15 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जा रही है। इस दौरान चयनित प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न विषयों के शैक्षिक वीडियो तैयार किए जाएंगे। तैयार वीडियो का प्रसारण पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनलों पर किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को गणित सहित विभिन्न विषयों की अवधारणाएं आसानी से समझने में मदद मिलेगी। प्रदेश स्तर पर डिजिटल शैक्षिक सामग्री निर्माण के लिए उन्नाव के शिक्षक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा का चयन जिले के शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस पहल से डिजिटल माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
