
मुंबई। आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुइके ने सोमवार को कहा कि आदिवासी समुदाय के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और उसे अगली पीढ़ियों तक पहुँचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए गहन शोध और अध्ययन की आवश्यकता है। इस अवसर पर मुंबई विश्वविद्यालय में आदिवासी अध्ययन और अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में ‘आदिवासी पहचान’ और उसका सांस्कृतिक महत्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष हर्ष चौहान, प्रो. शामराव कोरेटी और अतुल जोग उपस्थित थे। आदिवासी विकास मंत्री डॉ. वुइके ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से आदिवासी समुदाय की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक इतिहास पर गहन अध्ययन किया जाएगा। छात्रों और शोधकर्ताओं को आदिवासी इतिहास, संस्कृति और पहचान को समझने और अनुसंधान करने के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में “जनजातीय गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समुदाय के जल, जमीन और जंगल के अधिकारों के संरक्षण का महत्व बताया गया। राज्य के आश्रम विद्यालयों में छात्रों को उनके कार्यों और अन्य आदिवासी क्रांतिकारियों की गतिविधियों से परिचित कराने के लिए सूचना पुस्तिकाएँ वितरित की जाएँगी। आदिवासी समुदाय की प्रकृति-पूजक परंपरा, जिसमें पर्यावरण के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन शैली को बढ़ावा दिया जाता है, को संरक्षित और प्रसारित करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता है। कार्यक्रम में प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, हर्ष चौहान और अतुल जोग ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. प्रकाश मसराम ने की और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद कुमारे ने किया।




