
मुंबई। राज्य में ग्रंथालय आंदोलन को सशक्त बनाने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग करेगी, ऐसा प्रतिपादन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने किया। मंत्रालय में आयोजित राज्य ग्रंथालय परिषद की बैठक में वे दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से उपस्थित थे। मंगलवार को बैठक में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी, सहायक धर्मदाय आयुक्त राम लिप्ते, शालेय शिक्षा व क्रीड़ा विभाग के उपसचिव तुषार महाजन, उच्च शिक्षा विभाग के उपसचिव अमोल मुत्याल, ग्रंथालय संचालक अशोक गाडेकर, महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघ के अध्यक्ष गजानन कोटेवार सहित विभिन्न विभागों और क्षेत्रीय ग्रंथालय संघों के पदाधिकारी व अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने कहा कि राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार 16 वर्षों के बाद राज्य ग्रंथालय परिषद का पुनर्गठन किया गया है। यह परिषद ग्रंथालय आंदोलन को अधिक सक्षम बनाने के लिए सरकार को सलाह देने वाली एक प्रमुख संस्था है। ग्रंथालय आंदोलन को मजबूती देने के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी तथा ग्रंथालय प्रबंधन के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस निर्णय लिए जाएंगे। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सीएसआर फंड या राजा राममोहन राय योजना के माध्यम से मोबाइल रीडिंग वैन खरीदकर उन्हें गांवों, स्कूलों और दुर्गम क्षेत्रों में ले जाने का प्रस्ताव रखा गया। ‘गांव वहां ग्रंथालय’ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम विकास विभाग के साथ समन्वय करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा राज्य केंद्रीय ग्रंथालय और छह विभागीय ग्रंथालयों में प्रायोगिक आधार पर मोबाइल लाइब्रेरी सेवा शुरू करने, ई-लाइब्रेरी, ई-लाइब्रेरी यूनिक डाटाबेस और मोबाइल रीडिंग रूम जैसे विषयों पर चर्चा की गई। सार्वजनिक ग्रंथालयों की नियतकालिक जांच तीन वर्ष के अंतराल पर करने को भी मंजूरी दी गई। बैठक में ग्रंथालय संचालनालय के वर्ष 2008-09 से 2024-25 तक के वार्षिक प्रतिवेदनों को स्वीकृति प्रदान की गई।




