सिंहस्थ कुंभ 2027 का शंखनाद: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों नासिक के रामतीर्थ पर धर्मध्वजारोहण

नासिक। गोदावरी के पावन तट पर स्थित रामतीर्थ में शनिवार को नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभपर्व के शुभारंभ का भव्य धार्मिक समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों भगवा धर्मध्वजा फहराई गई। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और साधु-संतों की उपस्थिति में संपन्न इस समारोह ने पूरे नासिक शहर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। बारह वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों और धार्मिक परंपराओं के लिहाज से इसे ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबसे पहले यज्ञकुंड में आहुति अर्पित की। इसके बाद जीवनदायिनी गोदावरी का विधिवत पूजन कर धर्मध्वज को नमन किया। पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनके हाथों धर्मध्वजारोहण संपन्न हुआ। जैसे ही भगवा धर्मध्वजा आकाश में लहराई, शंखनाद और मंगलवाद्यों की ध्वनि से रामतीर्थ का परिसर गूंज उठा। इसके बाद मंत्रपुष्पांजलि अर्पित की गई। यज्ञाहुति, गोदावरी पूजन, ध्वज पूजन और धर्मध्वजारोहण के धार्मिक अनुष्ठानों ने सिंहस्थ पर्व के आगमन को पारंपरिक धार्मिक आधार प्रदान किया।

राष्ट्रपति के साथ उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक समारोह में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव, पालकमंत्री गिरीश महाजन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटील, स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, विपणन एवं राजशिष्टाचार मंत्री जयकुमार रावल, वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे, अन्न व औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल और मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे उपस्थित रहे। महापौर हिमगौरी आडके-आहेर, सांसद राजाभाऊ वाजे, सांसद भास्कर भगरे और सांसद डॉ. शोभा बच्छाव सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी समारोह में भाग लिया।
धर्मध्वजारोहण के पवित्र विधानों से सिंहस्थ को मिला धार्मिक आधार
समारोह में भारतीय वैदिक परंपरा के अनुसार प्रत्येक धार्मिक विधि पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न की गई। यज्ञकुंड में आहुति अर्पित करने के बाद गोदावरी पूजन और धर्मध्वज की पूजा की गई। पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच धर्मध्वजारोहण हुआ। शंखनाद, मंगलवाद्य और मंत्रपुष्पांजलि के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। गोदावरी के तट पर फहराई गई धर्मध्वजा को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सिंहस्थ कुंभमेले का मंगलमय निमंत्रण माना गया।
अखाड़ों के महंतों और संतों की रही विशेष उपस्थिति
विभिन्न अखाड़ों के महंत, धर्माचार्य और साधु-संतों की मौजूदगी ने समारोह को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज, श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज, मंगलपीठाधीश्वर श्री 1008 माधवाचार्य महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज, श्री पंच निर्मोही अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज, महंत संजयदास महाराज, श्रीमहंत मुरलीदास महाराज, श्रीमहंत वैष्णवदास महाराज, पंच दिगंबर अग्नि अखाड़े के श्रीमहंत माधवदास महाराज, श्रीमहंत मोहनदास महाराज, महंत भक्तिचरणदास महाराज और महंत रामस्नेही महाराज सहित अनेक संत इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। धार्मिक विधियों का पौरोहित्य पुरोहित संघ के सतीश शुक्ल और अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी ने किया।
सिंहस्थ कुंभपर्व: श्रद्धा और आस्था का महासंगम
सिंहस्थ कुंभपर्व केवल बारह वर्षों में आयोजित होने वाला धार्मिक मेला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महासंगम है। इसमें अलग-अलग भाषा, क्षेत्र और संप्रदायों के लोग एक ही श्रद्धाभाव से जुड़ते हैं। गोदावरी के तट पर फहराई गई धर्मध्वजा हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का प्रतीक बनी। इस समारोह ने संत परंपरा और सिंहस्थ की ऐतिहासिक धार्मिक विरासत को एक बार फिर जीवंत किया।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ की तैयारियों को मिला नया उत्साह
राष्ट्रपति के हाथों धर्मध्वजारोहण के साथ आगामी नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों को भी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से नई गति मिली है। देश-विदेश से आने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए नासिक और त्र्यंबकेश्वर में व्यवस्थाओं की तैयारी की जा रही है। पायाभूत सुविधाओं, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को लेकर विभिन्न सरकारी विभाग नियोजनबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं। प्राचीन धार्मिक परंपराओं की पवित्रता बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक हो।
जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
समारोह में विधायक सुहास कांदे, गोकुल गिते, राहुल ढिकले, देवयानी फरांदे, सीमा हिरे, सरोज अहिरे और दिलीप बनकर उपस्थित रहे। इसके अलावा विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम, सिंहस्थ कुंभमेळा प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह, उपमहापौर विलास शिंदे, महानगरपालिका आयुक्त मनीषा खत्री, नासिक महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण के महानगर आयुक्त जलज शर्मा, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, सार्वजनिक निर्माण विभाग की मुख्य अभियंता अरुंधती शर्मा, अधीक्षक अभियंता देवेंद्र पवार, प्राधिकरण के अतिरिक्त आयुक्त कमलाकर रणदिवे और प्रमोद पवार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
धर्मध्वज पर अंकित शुभचिह्नों का विशेष महत्व
सिंहस्थ धर्मध्वज पर विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीक अंकित हैं। अमृतकुंभ को अमरत्व, मुक्ति और देवी शक्ति का प्रतीक माना गया है। ॐकार सकारात्मकता, संपूर्ण ब्रह्मांड और सर्वव्यापकता का संदेश देता है, जबकि ‘श्री’ अक्षर विजय और मंगल का प्रतीक है। ध्वज पर अंकित 12 रेशमी गोंडे सामाजिक एकता और सामूहिक शक्ति का प्रतीक माने गए हैं। एक घंटा और तीन घुंघरू नाद तथा ब्रह्मनाद का संकेत देते हैं। ध्वज के दूसरी ओर गोदावरी के वाहन माने जाने वाले मगर के साथ सूर्य और चंद्र के शुभचिह्न भी अंकित हैं।रामतीर्थ पर संपन्न इस समारोह ने नासिक के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव में एक नया अध्याय जोड़ा। गोदावरी के पवित्र तट पर फहराई गई भगवा धर्मध्वजा ने बारह वर्षों से प्रतीक्षित सिंहस्थ कुंभपर्व के आगमन का संदेश दिया। संतों की परंपरा, श्रद्धालुओं की आस्था और आगामी महापर्व की तैयारियों के बीच यह आयोजन नासिक के इतिहास में एक यादगार अवसर बन गया।
